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Date 16-12-18

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संपादकीय

सच हो जाएगी भस्मासुर की कहानी

धर्म को निजी जीवन का हिस्सा बनाने की जगह सार्वजनिक और राजनैतिक जीवन में जरूरत से ज्यादा तरजीह देने का परिणाम अब कई भयानक रूपों में सामने आ रहा है। देश में अगले कुछ महीनों में आम चुनाव हो सकते हैं, उससे पहले अयोध्या में राम मंदिर बनाने का मुद्दा फिर राजनीति के केेंद्र में आ चुका है। अब तक…

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संगीत की स्वर लहरियों को चुप करने की राजनीति

क्या कोई भूल सकता है कि मोहम्मद रफी ने 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज' (बैजू बावरा) से लेकर 'इंसाफ का मंदिर है' (अमर) तक दिल को छू लेने वाले भजन गाए हैं। क्या उस्ताद बिस्मिला खान और उस्ताद बड़े गुलाम अली खान के भारतीय संगीत में योगदान को पंडित रविशंकर और पंडित शिवकुमार शर्मा के योगदान से कम बताया…

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बदलाव की बयार बनाम इलेक्शन मैनेजमेंट

चुनाव में अगर भाजपा का कोई चेहरा है तो वह रमन सिंह का है। वे कल तक तो राजनांदगांव में ही फंसे हुए थे। अगले पांच-सात दिनों में वे अपनी पार्टी के लिए जितनी मेहनत संभव है करेंगे ही, लेकिन भाजपा ने स्टार प्रचारकों की जो फौज उतारी है वह नाकाम हो रही है। नोटबंदी और जीएसटी के कारण व्यापारी…

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एक बार फिर काठ की हांडी चढ़ाने के फेर में हिन्दुत्ववादी संस्थाएं

लोकसभा चुनाव को देखते हुए संघ भाजपा और शिवसेना, विश्व हिन्दू परिषद, अन्तरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद व अन्य ऐसे ही संगठन व राजनीतिक दलों के लोगों को राम और उनका मंदिर याद आने लगा है जो 2019 तक वोट पड़ने तक याद रहेगा।

भारतीय जनमानस में यह याद रहे इसलिए ये सारी शक्तियां चंद लोगों के इशारे पर काम करने में…

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