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Date 20-11-17

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संपादकीय

अयोध्या : इन प्रवृत्तियों के रहते कैसे होगा समझौता?

लोकतंत्र में सहमति व स्वीकृति को बड़ा गुण माना जाता है, लेकिन अयोध्या मामले में इनके केन्द्र क्या होंगे और इसके प्रयासों में शामिल होने वालों का चयन किस प्रक्रिया, विधि और मान्यता के अनुसार होगा? इन सवालों का जवाब दिया जाना इसलिए जरूरी है कि कोई भी निर्णय भविष्य के लिए नजीर बनेगा। श्री श्री का विरोध करने वालों…

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एअर इंडिया के साथ बैंकों का निजीकरण कीजिए

यह तथ्य सही है कि सार्वजनिक इकाइयों में दलितों को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। परन्तु दलितों को आगे बढ़ाने में सार्वजनिक इकाइयां ही घाटे में आ जाएं तो यह नाव को ओवरलोड करके डूबाने जैसा हुआ। इसी उद्देश्यों को हासिल करने के दूसरे उपाय उपलब्ध है जैसे जो कंपनियां रोजगार कम संख्या में बनाती है अथवा जो दलितों…

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नेहरू बनाम पटेल

यह स्पष्ट है कि नरेन्द्र मोदी की जो राजनैतिक महत्वाकांक्षा है उसमें लालकृष्ण अडवानी के लिए कोई जगह नहीं है। वे कभी वाजपेयी जी के अनन्य सहयोगी रहे होंगे, आज उनकी उपयोगिता शून्य है। मुरली मनोहर जोशी और शांताकुमार जैसे वरिष्ठ नेता भी हाशिए पर हैं। इसी तरह एक ओर दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर तमाम योजनाएं चल रही हैं,…

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जम्मू-कश्मीर : सिर्फ वार्ताकार नियुक्त करने से क्या होगा?

कहने की जरूरत नहीं है कि गुजरात में जहां भाजपा को आने वाले चुनाव में बहुत गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है और 'विकास पुरुष' की नरेंद्र मोदी की छवि की चमक धुंधली पड़ चुकी है, संघ-भाजपा जोड़ी बढ़ते पैमाने पर सांप्रदायिक चेहरे को चमकाने वाले अपने जाने-पहचाने मुद्दों को निकाल रही है। इसकी शुरूआत तो तभी हो…

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