Breaking News

Today Click 2920

Total Click 3403650

Date 18-11-17

250 करोड़ के दाल घोटाले पर पर्दा डालने अफसर भेजेंगे कैबिनेट में मामला

By Mantralayanews :07-09-2017 09:10


 भोपाल। कम गुणवत्ता वाली मूंग दाल खरीदी का ढाई सौ करोड़ रुपए का भुगतान करने की अनुमति देने से मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने हाथ खड़े कर दिए हैं। लिहाजा, आला अफसरों ने अब घोटाले पर पर्दा डालने के लिए मामले को कैबिनेट में भेजने का फैसला किया है।

वित्त विभाग ने भी इस राशि के भुगतान से इनकार करते हुए साफतौर पर कह दिया है कि जो कम गुणवत्ता वाली यानी नॉन एफएक्यू (फेयर एवरेज क्वालिटी) दाल की खरीदी गई है, उसका पैसा किन किसानों से और कैसे काटा जाएगा। इसके बाद अफसर विचार कर रहे हैं कि क्यों न सारे मामले की जांच ईओडब्ल्यू (राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो) को सौंप दी जाए।

सरकार के लिए बना सिरदर्द

प्याज खरीदी में करोड़ों का घोटाला सामाने आने के बाद अब यह सरकार के लिए सिरदर्द बन गया है। नरसिंहपुर, रायसेन और होशंगाबाद जिले में प्रशासन द्वारा 23 हजार मीट्रिक टन घटिया स्तर की दाल खरीदी गई। इसमें से अकेले नरसिंहपुर जिले ने लगभग 15 हजार मीट्रिक टन नॉन एफएक्यू दाल खरीद ली।

कौन हैं भौंसले...

मुख्य सचिव ने इस बात पर खास आपत्ति जताई है कि जिन जिलों में घटिया स्तर की दाल खरीदी हुई है, वहीं के कलेक्टर क्या कर रहे थे। उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने पूछा कि नरसिंहपुर में कलेक्टर कौन है। नागरिक आपूर्ति निगम की एमडी नीलम शमी राव ने बताया कि रामराव भौंसले, इस पर उन्होंने पूछा कि कौन है ये भौंसले। उनके बारे में बताया कि ग्रामीण विकास विभाग में सीहोर में उन्होंने अच्छा काम किया है तो वहां मौजूद अफसरों ने कहा कि उस विभाग में अफसर काम कहां करते हैं।

गोलमाल तो हुआ है

सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव सिंह ने कहा है कि दाल खरीदी में गोलमाल तो हुआ है, इसकी जांच भी कराई जाना चाहिए। अफसरों से उन्होंने कहा कि पटवारी किसानों का सत्यापन नहीं कर सकते, वो तो वहीं लिख देंगे जो सामने वाला कहेगा। इसकी जांच तो ईओडब्ल्यू से कराई जाना चाहिए।

समितियों की है जिम्मेदारी

खरीदी समितियां करती हैं। उन्हें गुणवत्तायुक्त खरीदी के लिए स्थाई आदेश दिए हुए हैं। औसत दर्जे से कम पर जितनी भी उपज खरीदी गई है, उसकी जिम्मेदारी नियमानुसार उन्हीं की है। हमने निर्देश दिए हैं कि ग्रेडर लगाकर मूंग और उड़द को अपग्रेड किया जाए। इसके बाद उसे जमा कराया जाए। इसके बाद भी जितनी गुणवत्ताहीन मूंग व उड़द बचेगी, उसके बारे में कैबिनेट स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। 

- ज्ञानेश्वर पाटिल, प्रबंध संचालक, मार्कफेड

नॉन एफएक्यू खरीदी के नहीं थे निर्देश

नॉन एफएक्यू खरीदी के कोई निर्देश नहीं थे। चार-पांच जिलों को छोड़कर बाकी जगह अच्छी गुणवत्ता की मूंग और उड़द खरीदी गई है। औसत दर्जे से कम की दालों का निष्पादन कैसे किया जाए, इसको लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव रखेंगे।

- डॉ.राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव, कृषि

मूंग और उड़द के लिए उठाए कर्ज की बैंक गारंटी देगी सरकार

भोपाल। प्रदेश में पहली बार समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंग और उड़द का भुगतान किसानों को करने के लिए मार्कफेड ने बैंक से जो कर्ज उठाया है, उसे चुकाने की गारंटी सरकार लेगी। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की तैयारी हो गई है। इसके साथ ही खरीदी प्रक्रिया में जो नुकसान सामने आएगा, उसकी भरपाई के अलावा औसत दर्जे से कम की फसल का भुगतान कैसे और कितना किया जाए, ये भी सरकार ही तय करेगी। सूत्रों के मुताबिक मार्कफेड ने मूंग और उड़द खरीदने के लिए 800 करोड़ रुपए का कर्ज नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से लिया है। इसकी बैंक गारंटी अभी तक सरकार ने नहीं दी है। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव रखा जाएगा। साथ ही खरीदी और बिक्री के बीच के अंतर की भरपाई के साथ ही औैसत दर्जे से कम की मूंग और उड़द का भुगतान किसान को कैसे और कितना किया जाए, इस पर भी मंत्रिमंडल के स्तर पर फैसला होगा।

Source:Agency