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गोदामों में रखे खाद का ऑनलाइन सत्यापन करेगी सरकार

By Mantralayanews :07-09-2017 09:14


भोपाल। समिति स्तर पर खाद की कमी बताकर किया जाने वाला खेल अब नहीं चलेगा। सरकार गोदामों में रखी खाद का सत्यापन करने के लिए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लागू करने जा रही है। इसमें गोदामों में रखे स्टॉक को देखा जा सकेगा। इसी आधार पर राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) रिलीज ऑर्डर जारी करेगा। साथ ही यह भी आसानी से पता लग सकेगा कि कहां-कितनी पुरानी खाद रखी हुई है। इसके लिए मार्कफेड ने सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इससे सभी 260 गोदामों को जोड़ा जाएगा।

प्रदेश में हर साल 24 लाख टन से ज्यादा यूरिया, डीएपी सहित अन्य खाद लगती है। कृषि विभाग और मार्कफेड इसका इंतजाम करता है। अभी तक समितियों को जो खाद किसानों को बेचने के लिए दी जाती है, उसका उठाव गोदाम से हुआ या नहीं। कितना बिका और कितना बचत में है, ये पता लगाने के लिए समिति के ऊपर निर्भर रहना पड़ता था।

इसे देखते हुए अब ऑनलाइन रिलीज ऑर्डर जारी करने के साथ गोदामों को लिंक करने का फैसला किया गया है। मार्कफेड ने इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इससे किस गोदाम में कितनी और किस कंपनी की खाद है, ये पता लग जाएगा। साथ ही ये भी पता चलेगा कि समिति ने गोदाम से किस कंपनी की खाद उठाई और गोदामों में किस कंपनी की कितनी खाद रखी है।

मार्कफेड के प्रबंध संचालक ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि नई व्यवस्था में समिति को खाद उठाने का जो आदेश दिया गया और गोदाम से उसने जो उठाव किया, उसका मिलान आसानी से होगा। यदि अंतर की बात सामने आती है तो ये प्रमाणित हो जाएगा कि किसी न किसी स्तर पर गड़बड़ी हो रही है। इसके साथ ही किसी कंपनी की कितनी खाद कहां रखी हुई है, ये भी पता रहेगा।

इससे कंपनी वाले संघ को गुमराह नहीं कर सकेंगे। उठाव न होने से कुछ कंपनियों की खाद गोदामों में रखी रहती है। ऑनलाइन व्यवस्था से गोदामों के जुड़ने से इसकी जानकारी भी सरकार को रहेगी। पहले आओ और पहले पाओ की नीति का पालन भी कराया जा सकेगा। जो समिति पहले आएगी, उसे पहले खाद मिल जाएगा। इसमें किसी प्रकार की जुगाड़ नहीं चलेगी।
 

Source:Agency