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नई स्टडी का दावा, आपके पीने के पानी में प्लास्टिक है!

By Mantralayanews :08-09-2017 09:44


ज्यादातर घरों में नल से जो सप्लाई का पानी आता है उसे ही पीने के पानी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पानी का सेवन करने से हर दिन प्लास्टिक के 3 हजार से 4 हजार माइक्रोपार्टिकल्स यानी प्लास्टिक के छोटे-छोटे कण भी आपके शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। दरअसल, 14 देशों से इक्ट्ठा किए गए सैंपल्स के आधार पर हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। Orb मीडिया ने 159 टैप वॉटर के सैंपल्स की जांच कर एक रिपोर्ट तैयार की है जिसके मुताबिक 83 प्रतिशत नल के पानी में प्लास्टिक के कण पाए गए। वैसे तो समय के साथ प्लास्टिक भी खराब होता है लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं होता बल्कि छोटे-छोटे माइक्रोपार्टिकल्स में बदल जाता है और यही पार्टिकल्स पानी के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा और स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू यॉर्क के अनुसंधानकर्ताओं ने ये टेस्ट करवाए थे। हालांकि इस स्टडी के नतीजों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन अनुसंधाकर्ताओं ने बताया कि उनके पिछले टेस्ट के नतीजों के मुताबिक प्लास्टिक के कण समुद्र-तट और आसपास के वातावरण में मौजूद जहरीले और हानिकारक केमिकल्स और बैक्टीरिया को सोख लेते हैं, जो बाद में मछलियों और दूसरे स्तनधारी जीवों के शरीर में चला जाता है। 

इस स्टडी का संचालन करने वाली Orb मीडिया की टीम ने बताया कि प्लास्टिक की वजह से नदी, तालाब, समुद्र, बीच और यहां तक की हवा भी किस तरह प्रदूषित हो रही है, इस बात पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन मनुष्य जिन चीजों का उपभोग करता है, उनमें मौजूद प्लास्टिक और उसके हानिकारक असर के बारे में कोई बात नहीं हो रही है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि यह पहली स्टडी थी जिसमें पीने के पानी में मौजूद प्लास्टिक के कणों की मौजूदगी की जांच की गई। 

इस स्टडी के दौरान शुरुआती 3 महीने में यूगांडा के कंपाला, नई दिल्ली, जकार्ता, लेबनान के बेऊरत, इक्वाडोर के क्वितो के अलावा 7 यूरोपियों देशों और अमेरिका के अलग-अलग शहरों से सैंपल्स इक्ट्ठा किए गए थे। इन सैंपल्स में पाए गए ज्यादातर कण फाइबर्स थे जो 0.1 से 5 मिलीमीटर लंबे थे। इस स्टडी का संचालन करने वाली टीम के मुताबिक, नॉर्थ अमेरिका के टैप वॉटर में प्लास्टिक की सबसे ज्यादा सघनता पायी गई जबकि सबसे कम यूरोप के 7 देशों में। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इस बारे में और अधिक टेस्ट कर जानकारी इक्ट्ठा करने की जरूरत है ताकि प्लास्टिक के उपभोग से मनुष्य की सेहत को होने वाले संभावित खतरे के बारे में पूरी जानकारी हासिल की जा सके।

Source:Agency