Breaking News

Today Click 117

Total Click 3275613

Date 20-09-17

अंबेडकर के डॉक्टर्स ने रेडियो फ्रीक्वेंसी से जलाया बोन ट्यूमर

By Mantralayanews :12-09-2017 07:14


रायपुर। डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर्स ने बगैर चीरफाड़ (सर्जरी) हड्डी के ट्यूमर (बोन ट्यूमर) का सफल इलाज करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस प्रक्रिया के लिए जर्मनी से खरीदी गई रेडियो फ्रिक्वेंसी एबुलेशन मशीन का पहली बार इस्तेमाल किया गया है।

सबसे खास बात यह है कि इससे पहले छत्तीसगढ़ में कभी भी इलाज की इस पद्धति का इस्तेमाल नहीं किया गया, डॉक्टर सर्जरी ही करते हैं। इस बीमारी को ऑस्टियोस्ट ऑस्टियोमा कहा जाता है जो शरीर की हड्डियों में होती है और रेयर है।

डाक्टरों की मानें तो अंबेडकर अस्पताल में ही साल में 3-4 केस ही इस तरह के चिन्हित होते हैं। ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के अंदर जब ट्यूमर को जलाने संबंधित प्रक्रिया चल रही थी तो मरीज होश में था, उसके कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न किया गया था। मरीज ने अपनी इस प्रोसिजर को लाइव भी देखा है।

'नईदुनिया' से बातचीत में अंबिकापुर निवासी 19 साल के दिलीप कश्यप ने बताया कि उनके लिए ऑपरेशन थिएटर के अंदर ही जाना डरा देने वाला था, लेकिन जब पैर सुन्न हो गया तो पता ही नहीं चला। डॉक्टर आपस में प्रोसिजर से संबंधित बातचीत कर रहे थे और कुछ मिनटों में प्रोसिजर पूरी हो गई। दिलीप अभी पूरी तरह से ठीक है। हड्डी के इस ट्यूमर से मरीज को असहनीय दर्द होता है, आधी रात के बाद तो नींद पड़ना भी संभव नहीं है।

बीमारी का कारण नहीं आया सामने-

अब तक 'ऑस्टियोस्ट ऑस्टियोमा' के पीछे की वजह सामने नहीं आई है। दुनियाभर में इस पर शोध जारी हैं। यह बीमारी युवाओं में देखी गई है। साधारण एक्स-रे, एमआरआई से इसे डायग्नोस किया जा सकता है। बीमारी का सर्जरी के जरिए इलाज में 50-60 हजार रुपए खर्च आता है, जबकि अंबेडकर में यह बीपीएल परिवार के लिए निःशुल्क है।

ये है प्रक्रिया

रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विवेक पात्रे ने बताया कि जिस जगह ट्यूमर होता है उसके ऊपर एक इंजेक्शन लगाया जाता है और फिर इसके जरिए इलेक्ट्रोड को ट्यूमर वाली जगह तक भेजा जाता है, ये यहां पहुंचकर ट्यूमर को जला देता है। इसके बाद दोबारा इसके होने की कोई संभावना नहीं है। मरीज इस बीमारी से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है।

डॉक्टर्स जिन्होंने की सफल प्रोसिजर

रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एसबीएस नेताम, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक पात्रे, डॉ. सीडी साहू। हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. विनीत जैन। एनेस्थेसिया विभाग से डॉ. अर्नब।

कैंसर नहीं कहा जा सकता है

अभी तक कोई निश्चित कारण सामने नहीं आया है, लेकिन यह असहनीय दर्द देने वाली बीमारी है।इसे कैंसर नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह फैलता नहीं है। अब तक इसका इलाज सर्जरी से ही था। - डॉ. एसबीएस नेताम, विभागाध्यक्ष, रेडियोलजी, अंबेडकर अस्पताल

Source:Agency