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एक लाख से भी अधिक कंपनी निदेशकों पर गाज

By Mantralayanews :13-09-2017 07:48


करीब 2 लाख मुखौटा कंपनियों के बैंक खाते जब्त करने के बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय ने 1,06,578 निदेशकों की पहचान की है। विभाग इन निदेशकों को न केवल इन कंपनियों बल्कि अन्य कंपनियों के बोर्ड से 5 साल के लिए प्रतिबंधित करेगा। मंत्रालय ने कहा कि आईसीएआई, आईसीएसआई और अन्य संस्थाओं के कुछ सदस्य इन मुखौटा कंपनियों में शामिल हैं। उनकी पहचान की जा चुकी है। सरकार ने इन संस्थाओं से उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। सरकार इन संस्थाओं की कार्रवाई पर भी नजर रख रही है।

चार्टर्ड अकाउंटेंटों की संस्था आईसीएआई के सूत्रों ने बताया कि 26 सीए की पहचान की गई है और उनके खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं। आईसीएसआई के सूत्रों ने कहा कि कोई भी कंपनी सचिव इन मुखौटा कंपनियों में शामिल नहीं है। हालांकि कुछ ने नियमों का उल्लंघन किया है। एक सरकारी बयान के अनुसार मंगलवार तक जिन एक लाख से अधिक निदेशकों की पहचान की गई है वे कंपनी कानून, 2013 की धारा 164 (2)(ए) के तहत अगले 5 साल तक किसी भी कंपनी में निदेशक नहीं बन सकते। और भी निदेशकों को सरकार की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। मंत्रालय कंपनी रजिस्ट्रार के पास उपलब्ध इन कंपनियों के आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है।

बयान में यह भी कहा गया है कि इन मुखौटा कंपनियों की आड़ में काले धन को सफेद करने की गतिविधियां भी जांच के दायरे में है। इन निदेशकों का विवरण तैयार किया जा रहा है। इसमें उनकी पृष्ठïभूमि, अतीत और मुखौटा कंपनियों के कामकाज में उनकी भूमिका शामिल होगी। यह विवरण प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। डिफॉल्टर कंपनियों की धरपकड़ में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय, कंपनी रजिस्ट्रार, वित्तीय सेवा विभाग, बैंकों की एसोसिएशन और अन्य विभाग शामिल हैं।

कंपनी मामलों के राज्यमंत्री पी पी चौधरी ने कहा कि सभी संबंधित एजेंसियां इस मसले को प्राथमिकता से देख रही हैं। जब तक इन मुखौटा कंपनियों का नेटवर्क नहीं टूटता, काले धन के खिलाफ लड़ाई अधूरी रहेगी। मुखौटा कंपनियों के जरिये काले धन को सफेद करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। सरकार के बयान में कहा गया है कि इस प्रक्रिया से व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा और एक माहौल बनेगा जिससे भारत में कारोबार की सुगमता की राह आसान होगी। सरकार ने उम्मीद जताई कि हिस्सेदारों के हितों की रक्षा की जाएगी। आईसीएआई के सूत्रों ने कहा कि जिन 26 सीए की पहचान की गई है उनमें से कुछ के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। आईसीएसआई के एक सूत्र ने कहा कि करीब 30-40 कंपनी सचिवों की पहचान की गई है जिन्होंने चूक की है। हालांकि ये कंपनी सचिव किसी मुखौटा कंपनी में शामिल नहीं हैं।

हाल में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने ऐसी कंपनियों को नोटिस जारी किए थे जिनके बारे में माना जाता है कि वे गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के रूप में काम कर रही हैं लेकिन उन्होंने रिजर्व बैंक में पंजीकरण नहीं करा रखा है। उल्लेखनीय है कि डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले कंपनी रजिस्ट्रार के पास 13 लाख से अधिक कंपनियां पंजीकृत थीं। लेकिन 2,10,000 कंपनियों का पंजीकरण रद्द होने के बाद करीब 11 लाख कंपनियां बची हैं।
 

Source:Agency