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भूविस्थापितों को रोजगार नहीं देना संविधान का उल्लंघनः कोर्ट

By Mantralayanews :13-09-2017 08:07


बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कोरबा जिले के सरईपाली ओपन कास्ट परियोजना के लिए किसानों की जमीन लेने के बाद रोजगार नहीं देने को संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 का उल्लंघन माना है। कोर्ट ने एसईसीएल प्रबंधन को 45 दिनों के अंदर विस्थापितों को पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने का आदेश दिया है।

राज्य शासन ने एसईसीएल की सरईपाली ओपन कास्ट परियोजना के लिए 2007 में कोरबा जिले की पाली तहसील के ग्राम बुड़बुड़ में किसानों की 503.09 एकड़ जमीन और ग्राम राहाडीह में 45.69 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था।

प्रति एकड़ 8 लाख मुआवजा व पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने की बात कही गई। 2009 में अवॉर्ड पारित कर एसईसीएल ने जमीन पर कब्जा प्राप्त किया। किसानों को दो वर्ष देर से मुआवजा दिया गया। लेकिन पुनर्वास नीति के तहत रोजगार नहीं मिला।

इसके खिलाफ प्रभावित किसान प्यारेलाल, बाबू लाल, महेतरी बाई सहित 48 भू विस्थापितों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में नए भू अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा राशि बढ़ाने और विलंब से देने के कारण मुआवजे पर ब्याज देने और जमीन के बदले जमीन व रोजगार देने की मांग की गई।

याचिका में जस्टिस संजय के. अग्रवाल के कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाने और विलंब से भुगतान के कारण ब्याज देने की मांग को खारिज कर दिया। वहीं याचिकाकर्ताओं को पुनर्वास नीति के तहत एसईसीएल में रोजगार प्राप्त करने का हकदार माना है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को एसईसीएल के समक्ष अभ्यावेदन देने और एसईसीएल को 45 दिवस के अंदर पुनर्वास नीति के तहत इनके अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भूविस्थापितों को पुनर्वास और रोजगार का लाभ देना संविधान के अनुच्छेद 21 का तार्किक उपसिद्घांत है। रोजगार देने से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार अग्रवाल ने पैरवी की।
 

Source:Agency