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आयुष विवि में तय समय के बाद भी दिए थे 2000 से ज्यादा दाखिले

By Mantralayanews :07-11-2017 06:42


रायपुर। नर्सिंग कॉलेज दाखिला मामले में एक और बड़ा राज खुला है। नामांकन देने के पहले आयुष विश्वविद्यालय ने जांच कराई, जिसमें सामने आया है कि 2 हजार से अकि छात्र ऐसे हैं, जिन्हें 11 नवंबर, 2017 के बाद दाखिले दिए गए। इनमें 75 फीसद दाखिले निजी नर्सिंग कॉलेजों में हुए हैं।

ऐसे में विवि ने छात्रों के स्थायी नामांकन पर रोक लगा दी है। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग में अब तक के सबसे बड़ी गड़बड़ी में विभागीय स्तर पर बीते 9 महीने से जांच जारी है।

सोमवार को विवि ने उन सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को तलब किया, जिनमें तय समय के बाद दाखिले हुए थे।

3 सदस्यीय कमेटी इनके दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। इस प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात ये भी है कि रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर शासकीय नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों ने तय समय के बाद दाखिला देने संबंधित आईटी सेल, काउंसिलिंग समिति के आदेश का विरोध नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि इन पर भी कार्रवाई हो सकती है।

निजी कॉलेजों के लिए हुआ खेल

निलंबित आईटी सेल, काउंसिलिंग टीम के सदस्यों ने तय समय के बाद दाखिले का खेल निजी नर्सिंग कॉलेजों को लाभ पहुंचाने के लिए खेला। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव सुब्रत साहू ने नर्सिंग एसोसिएशन की मनमानी पर रोक लगाने के लिए प्रवेश नियम 2016 में एक बड़ा बदलाव कर दिया।

नियम बना दिए गए कि शासकीय और निजी दोनों सीट पर एक ही प्रवेश परीक्षा से दाखिले होंगे। इसके पहले एसोसिएशन खुद परीक्षा लेता था, कॉपी जांचता और प्रवेश बांटता था, लेकिन इस नियम से कॉलेजों को आर्थिक रूप से भारी नुकसान हुआ। जब सीट नहीं भरी तो अफसरों ने एसोसिएशन को परीक्षा लेने की अनुमति दे दी। पूरा खेल यहीं हुआ। 11 नवंबर से जनवरी तक दाखिले बांटे गए।

2 दाखिलों से उजागर हुआ मामला

7-8 मार्च 2017 को शासकीय नर्सिंग कॉलेज रायपुर में आईएनसी दिल्ली से निरीक्षण के लिए टीम पहुंची थी। टीम ने पाया कि 2 छात्राओं को तय समय यानी 11 नवंबर 2016 के बाद दाखिले दिए गए। 9 मार्च को 'नईदुनिया" ने 'नर्सिंग की 2 छात्राओं के दाखिले पर आईएनसी की आपत्ति से मचा हड़कंप" शीर्षक से खबर प्रकाशित की, जिसके बाद तो स्वास्थ्य महकमे में अफरा-तफरी मच गई।

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव सुब्रत साहू ने खुद जांच शुरू की। कॉलेजों के दस्तावेज संचालनालय तलब किए, लेकिन तब तक कइयों में छेड़छाड़ हो चुकी थी। सीएम डॉ. रमन सिंह ने भी पीएस से जवाब मांगा। इसके बाद जांच ने रफ्तार पकड़ी और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की आईटी सेल, काउंसिलिंग कमेटी भंग कर दी गई। आईटी सेल एवं काउंसिलिंग प्रभारी डॉ. सुमित त्रिपाठी, सदस्य डॉ. ओंकार खंडवाल निलंबित कर दिए गए तो नर्सिंग कॉलेज प्रभारी प्रो. सविना बैन ने खुद इस्तीफा दे दिया।

जांच जारी है

सभी नर्सिंग कॉलेजों से छात्रों के नामांकन संबंधित आवेदन भेजे गए हैं, उनकी जांच जारी है। संख्या तो नहीं बता सकते, लेकिन कई दाखिले निर्धारित तिथि के बाद हुए मिले हैं। सभी को अस्थायी नामांकन दिए हैं। 

-प्रो. केएल तिवारी, रजिस्ट्रार, आयुष विश्वविद्यालय
 

Source:Agency