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क्या प्रिंस अल वलीद की गिरफ्तारी से भारतीय शासक सबक लेंगे

By Mantralayanews :09-11-2017 07:19


दुनिया के मशहूर खरबपति प्रिंस अल वलीद की गिरफ्तारी से दुनिया के व्यापारी वर्ग हिल गए हैं। वैश्विक कम्पनियों पर आर्थिक नुक्सान की तलवार लटक रही है, प्रिंस अल वलीद की पूरी दुनिया में पूंजी लगी हुई है, उन्होंने कभी अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सहायता की थी और ट्रम्प को आर्थिक संकट से निकालने के लिए उनकी कम्पनियों में निवेश तक किया था। 

प्रिंस की सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं हुई, बल्कि उनकी संपत्ति को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित कर दिया गया है। हालांकि वलीद अकेले ऐसी शख्सियत नहीं हैं, जिन पर ऐसी गाज गिरी है, या फिर ऐसी गिरफ्तारी हुई है। वलीद के साथ 11 ऐसे लोग शामिल हैं जो मंत्री के पद पर थे, सुरक्षा की अहम जिम्मेदारियोंं का निर्वहन कर रहे थे। इनमें एक तो मीडिया मालिक भी है, जिसकी धाक सऊदी अरब में उल्लेखनीय थी।

दुनिया को अचंभित करने वाली इस कार्रवाई का आधार भ्रष्टाचार है, पर दुनिया के टिप्पणीकारों का मत है कि सऊदी अरब के शाह ने अपने बेटे की सत्ता स्थिति को मजबूत करने और जनता में फैले आक्रोश को कम करने के लिए यह कार्रवाई की है। कारण जो भी हो, पर यह कार्रवाई न केवल अरब दुनिया के लिए आश्चर्यजनक है बल्कि शेष दुनिया के लिए भी कम आश्चर्यजनक नहीं है। सऊदी अरब ने यह साबित करने की कोशिश की है कि वह ताकतवर व्यापारी वर्ग को जमींदोज कर सकता है, उसकी संपत्ति को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर सकता है, जो न केवल अपनी संपत्ति की शक्ति से शासकों को उंगलियों पर नचाने के लिए जाने जाते हैं और जिसके सामने शासक भी नतमस्तक होते हैं। 

सऊदी अरब अभी कई संकटों से घिरा हुआ है, उसके सामने अपने वर्चस्व को स्थापित रखने की चुनौतियां खड़ी हैं। उसे न केवल बाहरी  बल्कि आंतरिक संकट भी है। उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब अपने आप को अरब दुनिया का अगुवा मानता है, वह एक सुन्नी देश है और अरब सुन्नी बहुल क्षेत्र ही है लेकिन ईरान जैसे देशों से उसके वर्चस्व को चुनौती मिलती है, जबकि शिया आतंकवादी संगठनों की भी चुनौती का उसे सामना करना पड़ता है, शिया आतंकवादी संगठन अरब में शाह शासन को हिंसक चुनौती देने के लिए सक्रिय रहे हैं, सऊदी अरब ने कई शिया विचारकों को आतंकवादी मानकर मौत की सजा सुनाई है फिर भी शिया आतंकवादी संगठनों की सक्रियता कम नहीं हुई है। 

Source:Agency