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जालसाज राजेश की संपत्ति 11 करोड़ तक पहुंची, पुलिस ने जुटाए दस्तावेज

By Mantralayanews :09-11-2017 08:23


रायपुर। 85 करोड़ के डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल घोटाला मामले में जेल में बंद स्कूल संचालक राजेश शर्मा की संपत्ति का आंकड़ा 11 करो़ड़ तक पहुंचा है। एसआईटी ने राजेश शर्मा और उसकी पत्नी उमा शर्मा के खिलाफ दस हजार पन्नाों की तगड़ी चार्जशीट तैयार की है।

पुलिस अफसरों का दावा है कि अभी चार्जशीट तैयार करने में पंद्रह से बीस दिन का समय और लगेगा। शर्मा दंपति के नाम पर रायपुर समेत अन्य जिलों में कई एकड़ बेशकीमती जमीन, स्कूल भवन आदि होने का दस्तावेजी सबूत पुलिस ने हासिल कर लिए हैं।

पुलिस के मुताबिक राजेश शर्मा के खिलाफ रायपुर के सरस्वती नगर, गोबरानवापारा, सारंगढ़, महासमुंद, पिथौरा, बागबाहरा, सरायपाली, कवर्धा, पाटन, बेमेतरा, साजा (दुर्ग), रायगढ़ के कोतवाली, गरियाबंद, राजनांदगांव के डोंगरगांव आदि जगहों पर धोखाधड़ी के 14 केस दर्ज हैं।

इन प्रकरणों में राजेश के साथ उसकी पत्नी उमा समेत संजय कुमार महापात्र, विश्वकांता जैना, मानस राजन पाणिग्रही, देवासिंह पटनायक, अखिलेश शर्मा, गीता तिवारी, रूबी सलूजा, अजय शर्मा, अनिल शर्मा, मनोरमा शर्मा, एनके शर्मा समेत वर्ष 2011 में गरियाबंद थाने में दर्ज धोखाधड़ी के प्रकरण में फिल्म अभिनेता मुकेश खन्नाा और गूफी पेंटल को भी नामजद आरोपी बनाया गया है।

यहां करोड़ों की जमीन

गोबरा नवापारा, राजिम, बेमेतरा, साजा, कवर्धा, भाटापारा, सारंगढ़, मुंगेली आदि जगहों में दो से चार एकड़ जमीन, कुछ जगहों पर स्कूल भवन भी बने हुए हैं। इन पर दूसरे लोगों का कब्जा है। जमीन की कीमत का आकलन 11 करोड़ रुपए किया गया है। इसके अलावा 30 लाख की प्रिंटिंग मशीन भी पुलिस ने जब्त की है।

राजेश की सभी संपत्तियों के दस्तावेज राजस्व विभाग से ले लिए गए हैं। सारे दस्तावेजों को कोर्ट में पेश कर कुर्की की कार्रवाई के साथ ही नीलाम करवाई जाएगी। इससे मिलने वाली रकम घोटाले के पीड़ितों के बीच वितरित की जाएगी।

किसके कब्जे में गाड़ियां, पता नहीं

राजेश शर्मा ने स्कूल में बच्चों को लाने और घर ले जाने के लिए टाटा फाइनेंस कंपनी से 72 गाड़ियां एक साथ फाइनेंस कराई थी। इनमें दो इंडिको कार, 3 बस के अलावा बाकी टाटा मैजिक वाहन थे। पुलिस ने तफ्तीश की तो पता चला कि फाइनेंस कंपनी ने किश्त की रकम नहीं पटाने पर 41 गाड़ियों को सीज करने के बाद उन्हें नीलाम कर दिया है।

बाकी बची 31 गाड़ियों पर शहर के रसूखदारों का कब्जा है। फाइनेंस कंपनी के अधिकारियों ने इन 31 गाड़ियों का भुगतान होने की जानकारी दी है। लिहाजा एसआईटी अब इन गाडियों की किश्त पटाने वाले कारोबारियों की सूची निकलवा रही है। फिलहाल फाइनेंस कराई गई 31 गाड़ियां कहां हैं? अब तक इसका पता नहीं लग पाया है।
 

Source:Agency