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नंबर 1 का पीछा नहीं, मुझे अभी काफी कुछ हासिल करना है: पीवी सिंधु

By Mantralayanews :10-11-2017 06:51


अगर आप पीवी सिंधु से पर्फेक्शन के मायने पूछें तो वह कहेंगी- यह कभी न खत्म होने वाला सफर है। रास्ते में जो भी मिले, चाहे वह बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हो या फिर रेकॉर्ड तीसरी बार कोरिया ओपन सुपर सीरीज का खिताब, BWF की रैंकिंग में महिला एकल में दूसरे पायदान पर पहुंचना हो या फिर किसी टूर्नमेंट में लीग स्टेज में ही बाहर हो जाना- ये सब उस सफर का हिस्सा हैं।

इस साल सिंधु ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया, अपना पहला इंडिया ओपन जीता और तीसरी बार कोरिया ओपन सुपर सीरीज जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। इन सब कामयाबियों के बीच वह ऑस्ट्रेलिया ओपन सुपर सीरीज के क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचीं, फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया और पिछले महीने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग यानी नंबर 2 तक पहुंचीं। 

नहीं, क्योंकि इस साल चोटी के सभी बड़े खिलाड़ी खेल रहे थे। यह अब भी एक महत्वपूर्ण टूर्नमेंट है। यह मुश्किल टूर्नमेंट था। मैंने अपना नैसर्गिक खेल खेला और इस टूर्नमेंट को किसी भी तरह कमतर नहीं समझा। एक बार जब मैं फाइनल में पहुंच गई तो मुझे मालूम था कि साइना के सामने मुकाबला आसान नहीं होगा, मैं यही सोचकर ही मैदान में उतरी थी। यह एक अच्छा मैच था, हालांकि मैं इसे जीतना चाहती थी। खैर, यह सब खेल का हिस्सा है। 

महिला बैडमिंटन अब बहुत प्रतिस्पर्धी हो गया है। मुझे लगता है कि चोटी की 20 खिलाड़ी लगभग बराबर हैं। कोई भी दो खिलाड़ी एक जैसी नहीं हैं क्योंकि सभी की स्टाइल अलग है और सभी के पास अलग तरह के स्ट्रोक्स हैं। किसी भी दिन किसी खिलाड़ी के लिए कोई रणनीति काम कर सकती है। सबसे जरूरी है कि अति आत्मविश्वास से बचा जाए। आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि मैं चोटी की खिलाड़ी हूं सिर्फ इसलिए यह मैच जीत जाऊंगी। फोकस रहना जरूरी है। 

Source:Agency