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कई घोटालों की आंच, आय से अधिक मामले में फंसे पूर्व कुलसचिव

By Mantralayanews :10-11-2017 07:29


रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में पिछले सालों में फॉर्म, पुनर्मूल्यांकन घोटाले के मामले आ चुके हैं, जो भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं। पूर्व कुलसचिव केके चंद्राकर को एंटी करप्शन ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल भेजकर इस पर मुहर भी लगा दी है। लेकिन अभी भी सवाल बाकी हैं। सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विवि में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के रास्ते क्या हैं।

2002 के बाद रविवि में सबसे अधिक समय बिताने वाले कुलसचिव चंद्राकर के पास इतनी संपत्ति कहां से आई ? विवि में भी इसकी चर्चा गर्म है। बताया जाता है कि कुलसचिव तब लोगों के निशाने में आए थे, जब विवि ने करीब एक करोड़ रुपए का स्वागत द्वार तैयार करवाया था। मामले में कुलसचिव के खिलाफ शिकायत हुई थी। इसके अलावा ऑडिट ऑपत्तियां सालों से लंबित हैं। इनमें भी गड़बड़ियां होने की आशंका है।

30 लाख का फॉर्म घोटाला

रविवि में साल 2010-11 में बहुचर्चित 30 लाख रुपए का फॉर्म घोटाला सामने आया था। इस मामले में विवि ने सिर्फं एक अदने से कर्मचारी को बर्खास्त करके इतिश्री कर ली। रकम की रिकवरी भी नहीं हो पाई। 2015-16 में फॉर्म घोटाले सामने आया, जिसमें अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में कुलपति डॉ .एसके पाण्डेय व कार्यपरिषद ने दोबारा जांच कराने का आदेश दिए हैं।

पुनर्मूल्यांकन में लाखों का फर्जीवाड़ा

पुनर्मूल्यांकन घोटाले में एक प्रोफेसर को विवि ने आरोपी बनाया, लेकिन अभी तक कार्यपरिषद में इस एजेंडे पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विभागीय जांच में यह साबित हो चुका है कि यहां पुनर्मूल्यांकन के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है। मामले में संबंधित प्रोफेसर को सिर्फ निलंबित किया गया है।

लाखों की ऑडिट ऑपत्तियां

रविवि में 2011 के बाद लाखों की ऑडिट ऑपत्तियां आ चुकी हैं, जिनका निराकरण नहीं हो पाया है। 19 अप्रैल 2017 को राज्य समन्वय समिति की बैठक में विवि को तीन महीने के भीतर इन ऑडिट आपत्तियों का निराकरण करने के लिए कहा गया है।

गौरतलब है कि एसीबी की टीम ने अभियोग पत्र में कहा है कि कुलसचिव केके चंद्राकर ने 1 अपै्रल 2002 से 9 अपै्रल 2016 के बीच 1.53 करोड़ रुपए अर्जित किया, जबकि 2.23 करोड़ रुपए खर्च किया है। इस तरह आय से अधिक खर्च किया है। यानी 66.76 लाख रुपए अधिक खर्च किया है।

मामले हटाए नहीं गए हैं

पुनर्मूल्यांकन और फॉर्म गड़बड़ी दोनों ही मामले कार्यपरिषद से नहीं हटाए गए हैं। कार्रवाई की प्रक्रिया इनमें चल रही है। - डॉ. एसके पाण्डेय , कुलपति, पं.रविवि
 

Source:Agency