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भोपाल में 300 साल पुराना हमाम, विरासत बचाने करोड़ों के ऑफर ठुकराए

By Mantralayanews :11-11-2017 08:29


भोपाल। चमचमाता राजा भोज सेतु, कमला पार्क, वर्धमान पार्क, आसपास आलीशान बिल्डिंग और सामने शहर की पहचान बड़ा तालाब, यानी भोपाल की सबसे प्राइम लोकेशन। यहीं, सड़क किनारे फल के ठेलों के पीछे छिपा हुआ पुराना लोहे का गेट है।

थोड़ा अंदर जाने पर बड़ी बड़ी बिल्डिंगों की आड़ में दबा हुआ एक पुराना ढांचा नजर आता है। यह देश ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का सबसे पुराना वो हमाम है जो आज भी वैसे ही चल रहा है जैसे तीन सौ साल पहले चलता था।

तीन सौ साल से यदि यहां कुछ नहीं बदला है तो इसका श्रेय जाता है उस परिवार को जो इतने सालों से यहां आने वालों की खिदमत करता आ रहा है। इतिहास और शहर की पहचान कायम रहे इसलिए इस परिवार ने इस बेशकीमती जमीन के लिए बिल्डरों के 10 करोड़ रुपए तक के ऑफर भी नामंजूर कर दिए। दीपावली से होली तक चालू रहने वाला कदीमी हमाम इस सीजन के लिए फिर से तैयार है।

खास से आम तक का हमाम

हमाम और परिवार का इतिहास पूछने पर 60 साल के अतीक बताते हैं कई पीढ़ियों से उनका परिवार इस हमाम और यहां आने वालों की खिदमत करता आ रहा है। बेहद साधारण माली हालत और तमाम मुश्किलों के बाद भी अब नई पीढ़ी भी इस काम के लिए तैयार हो रही है।

अतीक का दावा है कि ये देश ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे पुराना चालू हमाम है और यहां कुछ भी नहीं बदला है। लोगों की मालिश से लेकर नहाने तक की सारी प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही है जैसी तीन सौ साल पहले थी। हमाम की इमारत में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है और यही इसकी खासियत है।

यदि इससे छेड़छाड़ हुई तो हमाम नष्ट हो जाएगा। इतिहासकारों और आर्किटेक्ट का मानना है कि 1720 के आसपास का यह हमाम गोंड शासकों के काल का है। बाद में भोपाल नवाब और उनके मेहमानों के लिए इस्तेमाल होने लगा। अतीक बताते हैं उनके पूर्वज हम्मू ने हमाम में काम शुरु किया था। उसके बाद भोपाल की शाहजहां बेगम ने यह हमाम उनके परिवार के नाम कर दिया था।
 

Source:Agency