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एक बार फिर तबादले से आहत अशोक खेमका का झलका दर्द, किया ट्वीट

By Mantralayanews :13-11-2017 06:41


चंडीगढ़। हरियाणा के सीनियर आइएएस अधिकारी अशोक खेमका का एक बार और तबादला हो गया है। वह इससे बेहद आहत हैं। उनका यह 51वीं बार तबादला किया गया है। वह बेहद कम समय के अंतराल में होने वाले अपने तबादलों से दुखी हैं। उन्‍होंने अपने दर्द का इजहार ट्वीट कर किया है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से हटाकर खेल विभाग में स्थानांतरित कर दिए जाने के करीब दो घंटे बाद खेमका ने ट्वीट कर अपने तबादले पर हैरानी जताई। ट्वीट में खेमका ने कहा कि उन्होंने अपने मौजूदा विभाग में काम करने की काफी प्लानिंग कर रखी थी, लेकिन तभी तबादले की खबर आ गई। यह खबर काफी आश्चर्यजनक और चौंकाने वाली है।

अशोक खेमका ने ट्वीट में लिखा है कि यह सब अस्थायी होता है। वह एक बार फिर नई ताकत और ऊर्जा के साथ काम करने को तैयार हैं और नई जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वाह करेंगे। बता दें कि अशोक खेमका का लगातार तबादला कई बार राज्‍य में चर्चा का मुद्दा बन चुका हो। राज्‍य में किसी भी पार्टी की सरकार हो खेमका पर तबादले की गाज गिरती रही है।

हरियाणा सरकार ने रविवार को तत्काल प्रभाव से 13 आइएएस अधिकारियों के तबादले किए। इनमें अधिकतर वरिष्ठ आइएएस हैं। इस सूची में अशोक खेमका का नाम भी शामिल था। खेमका को हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के साथ लगाया गया है। दोनों के बीच नजदीकियां मानी जाती हैं। खेमका अब खेल एवं युवा मामलों के प्रधान सचिव होंगे।

अशोक खेमका अभी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव थे। उन्होंने इस पद पर रहते हुए 3,22,000 लोगों की पेंशन बंद कर दी थी। पेंशन बंद होने का कारण हालांकि दस्तावेजों में कमी पाया गया था, लेकिन इस वजह से सरकार को जवाब देना भारी हो गया था। बाद में जांच के दौरान दो लाख 21 हजार लोगों की पेंशन चालू भी हो गई थी।

अशोक खेमका का अपने विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार बेदी से टकराव हो गया था। खेमका ने विभाग की गाड़ी मंत्री के साथ अटैच होने का विरोध करते हुए इसे वापस मंगवाने के लिए उन्हें पत्र लिख दिया था। यह गाड़ी अंबाला कार्यालय की थी। पत्र लिखे जाने के अगले दिन ही विभाग को गाड़ी वापस भेज दी गई थी।

खेमका वॉल्यूम सीट खरीद मामले में भी नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला और कांग्रेस विधायक रघुबीर सिंह कादियान के निशाने पर रहे हैं। दोनों नेताओं ने खरीद पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि बाद में भाजपा विधायक मूलचंद शर्मा के नेतृत्व वाली विधान सभा के कमेटी ने अशोक खेमका को क्लीन चिट दे दी थी। कादियान ने  क्लीन चिट देने का विरोध किया था।

अनिल विज की छवि इमानदार मंत्री की है, जबकि खेमका की छवि इमानदार अफसर की है। अब दोनों के साथ-साथ जोड़कर सीएम ने न केवल बाकी मंत्रियों की परेशानी कम कर दी, बल्कि इससे कूटनीतिक दांव भी चला है।
 

Source:Agency