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पॉलिएस्टर उत्पादन बढ़ाकर रिलायंस देगी चीन को टक्कर

By Mantralayanews :13-11-2017 07:24


मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) पॉलिएस्टर कारोबार में अपनी पैठ बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने हाल में अपना एक नया ब्रांड रेलॉन शुरू किया है, जिसके जरिये वह परिधान की सह-ब्रांडिंग में कदम रख रही है। बिजनेस टू बिजनेस टू कंज्यूमर (बीटूबीटूसी) मॉडल ध्यान में रखते हुए कंपनी वैश्विक बाजार में चीन के दबदबे को चुनौती देना चाहती है।


देश में कुल 45 लाख टन पॉलिएस्टर का उत्पादन होता है। इसमें आरआईएल की भागीदारी करीब 20 लाख टन है। कंपनी इस कारोबारी खंड में सालाना 5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद कर रही है। विश्व में करीब 7 करोड़ टन पॉलिएस्टर का उत्पादन होता है, जिसमें चीन 4.5 करोड़ टन का उत्पादन करता है। इस तरह वह भारत से आगे है।

रेलॉन विशेष परिधान का पोर्टफोलियो है और इसके लिए रिलायंस ने अमेरिका के वीएफ कॉर्पोरेशन के साथ सहयोग किया है जो विश्व के प्रमुख ब्रांड रेंगलर की मालिक है। इस साझेदार की मदद से कंपनी फरवरी 2018 तक कूलटेक्सव फैब्रिक से बने इन्फीकूल डेनिम की शुरुआत करेगी। रेलॉन में नमी नियंत्रित करने की खूबी है।


कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम अपने रेलान ब्रांड के साथ साझेदारी के लिए कम से कम 5 घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के साथ बातचीत कर रहे हैं। रेलान ब्रांड के जरिए आरआईएल को देश के 2,50,000 करोड़ रुपये के परिधान उद्योग में बड़ी जगह बनाने में  आसानी होगी।' आरआईएल की इस पहल से भारत को फै ब्रिक के आयात पर निर्भरता भी कम करने में भी मदद मिलेगी। पिछले तीन साल में भारत का फै ब्रिक आयात औसतन 50 करोड़ वर्ग मीटर (मूल्यांकन 1.2 अरब डॉलर) रहा है।


परिधान उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार देश में 90 प्रतिशत फै ब्रिक का आयात चीन से होता है जबकि शेष आयात मलेशिया, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया से। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से भारत को विशेष परिधानों के लिए आयात खासकर चीन से माल मंगाने में निर्भरता कम करने में आसानी होगी। भारत को इससे विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद मिलेगी।

Source:Agency