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Date 23-11-17

गांव ने एक माह से बिजली नहीं देखी, फिर भी लोगों को लग रहा 'करेंट'

By Mantralayanews :13-11-2017 07:51


कोरबा। बिजलीविहीन वनांचल ग्रामों में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली कनेक्शन दिया गया है। इसके लिए केबल लाइन बिछाई गई है, पर खराबी आने की वजह से केऊबहार गांव में पिछले एक माह से बिजली बंद है। उसके बाद विभाग ने यहां मरमम्त कार्य नहीं किया। ग्रामीण अंधेरे में रात गुजार रहे।

बावजूद इसके अब बिजली बिल भी थमा दिया गया है। हैरत की बात तो यह है कि जिस ग्रामीण ने कनेक्शन नहीं लिया, उसे भी बिल दे दिया गया है। परेशान ग्रामीण बिल लेकर कार्यालय का चक्कर काट रहे।

सर्वाधिक बिजली उत्पादन करने वाले जिले में अधिकांश गांव अभी भी रोशन नहीं हो सके हैं। हालांकि कई गांव में सौर ऊर्जा से बिजली प्रदान की जा रही है, पर परंपरागत बिजली पहुंचाने का काम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) के तहत शुरू हो सका।

लगभग डेढ़ वर्ष पहले दर्री ग्रामीण वितरण केंद्र अंतर्गत वनांचल ग्रामों में विद्युतीकरण का काम आरंभ कराया गया। केबल बिछा कर कई गांव तक विद्युत पहुंचाई गई, पर वनाच्छादित क्षेत्र होने की वजह से इन ग्रामों में नियमित रूप से बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

लंबी लाइन होने से जगह-जगह खराबी आने पर बिजली बंद रहती है। ग्राम केऊबहार की स्थिति भी यही है। जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित इस ग्राम में आरजीजीवीवाई के तहत केबल बिछा कर बिजली प्रदान की गई, पर केबल में फाल्ट आने की वजह से बिजली बंद हो गई।

वर्तमान में एक माह से गांव में बिजली बंद है। विभाग अब तक केबल में फाल्ट नहीं खोज सका है। बिजली नहीं होने से ग्रामीण काफी हलाकान हैं। अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है।

इधर विभाग ने बिना बिजली सुविधा दिए ही बिल भेजना शुरू कर दिया है। बिल मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है। उनका कहना है कि विभाग पहले नियमित सुविधा उपलब्ध कराए, इसके बाद ही बिल भेजे। नाराज ग्रामीणों ने बिल जमा करने से इंकार कर दिया है। गांव में विद्युतीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने ग्रामीण जुटे हुए हैं।

लंबी लाइन, फाल्ट ढूंढ़ने में दिक्कत

वनांचल क्षेत्र में केबल बिछाने के लिए वितरण विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी है। पेड़ों की वजह के कई बार खराबी आ रही है। एक स्थान पर केबल खराब होता है, तो खराबी ढूंढ़ने हलाकान हो जाते हैं।

बताया जा रहा है कि केबल के स्थान पर तार बिछाने का निर्देश दिया गया था, पर वन विभाग के केबल के माध्यम से बिजली आपूर्ति की मंजूरी दी गई है। इससे विभाग को तार बिछाना मुश्किल हो गया है। बावजूद विभाग ने डीपीआर तैयार कर मुख्यालय भेजा है।

हमारे घर में आज तक बिजली जली ही नहीं है। इसके बाद भी बिल हमारे पास पहुंच गया। विद्युत कंपनी की कार्यशैली से ग्रामीण परेशान हैं। बिल भेजने की बजाय कंपनी पहले बिजली की सुविधा प्रदान करे। - जुधनी लकड़ा

- आजादी के 70 साल बाद तो केबल लाइन, तार और खंभे देखने को मिले हैं। बल्ब नहीं जला और बिजली बिल पहुंंच गया। बिल देख कर ग्रामीण परेशान हैं। बिना सुविधा के बिल क्यों देंगे। - रमशीला

- केऊबहार में आरजीजीवीवाई के तहत केबल बिछा कर बिजली सुविधा शुरू की गई थी। केबल में फाल्ट आने से बिजली बंद है। बिल क्यों पहुंचा, इस संदर्भ में जानकारी लेने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकता है। - राजकुमार, सहायक यंत्री, कटघोरा
 

Source:Agency