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इंद्रावती से विलुप्त हो रही मेंडकोरी मछली, ये है कारण

By Mantralayanews :14-11-2017 08:02


जगदलपुर। बस्तर की इंद्रावती नदी में कभी मेंडकोरी मछली की भरमार होती थी लेकिन अब यह खत्म हो रही हैं। ऐसी स्थिति नदी में मांसाहारी मछलियों की संख्या बढ़ने से पैदा हुई है। मांसाहारी मछलियां मेंडकोरी के बच्चों को खा रही है।

बस्तर की इंद्रावती नदी के अलावा नारंगी और मारकंडी नदी में कभी मेंडकोरी मछली मिलती है। निषाद समाज के एमआर निषादराज ने बताया कि बस्तर की अन्य नदियों की तुलना में इंद्रावती में मेंडकोरी अधिक मिलती है।

वर्षों से बस्तर के कुड़क जाति के लोग इन नदियों में बड़ी संख्या में मेंडकोरी मछली पकड़ते रहे हैं परंतु पिछले आठ – दस वर्षो में यहां की नदियों में मांगुर, बोध, बॉंम, केंऊ जैसी मांसाहारी मछलियों की संख्या बढ़ी है। 

मांसाहारी मछलियां मेंडकोरी के बच्चों को अपना खुराक बना रही है, जिससे इनकी संख्या में भारी कमी आई है।

कहते हैं कि मांगुर को पालना प्रतिबंधित है लेकिन कुछ लोग गलत तरीके से इनका पालन कर रहे हैं। बारिश के दिनों में तालाबों का संपर्क नदियों से हो जाता है इसलिए तालाबों की मांगुर, केंऊ जैसी मांसाहारी मछलियां नदियों में पहुंची और मेंडकोरी के आदर्श वास इन्द्रावती, नारंगी और मारकण्डी नदी में इन्हें खा रही हैं।

नदियों में मेंडकोरी की संख्या कम होने के कारण ही लोहण्डीगुड़ा, करंजी, बस्तर, नगरनार आदि बाजारों में इनकी आवक काफी कम हो गई है। ग्रामीणों को कहना है कि नदी में अब पहले जैसी संख्या में मछलियां नहीं मिलती है। मछलियां पकड़ने का काम पहले के मुकाबले अधिक होने लगा है।
 

Source:Agency