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मधुमेह दिवस : यहां 500 बच्चों को मुफ्त मिल रही इंसुलिन

By Mantralayanews :14-11-2017 08:08


रायपुर। प्रदेश के टाइप-1 डायबिटिक बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना 26 अगस्त 2017 को लांच की गई। सीएम डॉ. रमन सिंह की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक 500 बच्चों को निःशुल्क इंसुलिन दी जा रही है।

हर बच्चे के पीछे सरकार 25 हजार रुपए सालाना खर्च कर रही है। लेकिन यह बहुत कम है, क्योंकि अनुमान के मुताबिक तीन हजार से अधिक बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं। यानी ढाई हजार से अधिक पीड़ित बच्चों तक स्वास्थ्य विभाग नहीं पहुंच पाया है।

विभाग के लिए इन्हें ढूंढ़कर पंजीयन करवाना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), सिविल सर्जन को इन्हें खोजने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन कई जिले में यह काम ही नहीं हो पा रहा।

26 अगस्त को विभाग के अफसरों ने दावा किया था कि 400 केस ढूंढ़ लिए गए हैं, जबकि 14 नवंबर 2017 तक 500 यानी 76 दिनों में 100 केस ही मिले। आर्थिक रूप से असक्षम परिवार इलाज का बोझ नहीं उठा सकते। ऐसे में इस योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए घर-घर अभियान चलाना होगा। गौरतलब है कि सरकार 0 से 14 साल तक के बच्चों को निःशुल्क इंसुलिन मुहैया करवा रही है।

मधुमेह के लक्षण

- बार-बार भूख लगना, लगातार वजन घटना, अधिक प्यास लगना, शारीरिक कमजोरी।

मधुमेह से बचाव-

- संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, शराब एवं तंबाकू के सेवन से बचें, रक्त शर्करा को संतुलित बनाए रखें, वजन एवं रक्तताप संतुलित रखें, कोलेस्ट्राल को न बढ़ने दें, शुगर, किडनी, आंखों एवं पैरों की जांच नियमित करवाएं।

जानें टाइप 1 डायबिटीज के बारे में-

टाइप 1 मधुमेह या जुवेनाइल डायबिटीज पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं (इन्सुलिन का स्राव करती हैं) के पूर्ण क्षतिग्रस्त होने के कारण होती है। इसके चलते मांसपेशियों के द्वारा ग्लूकोस का उपयोग नहीं हो पाता और रक्त में मौजूद ग्लूकोस यूरिन के माध्यम से शरीर के बाहर हो जाता है।

86 हजार ग्लूकोमीटर वेयर हाउस में-

2015-16 में स्वास्थ्य विभाग बाल मधुमेह योजना लांच करने की पूरी तैयारी कर चुका था, लेकिन विभाग को टाइप-1 पीड़ित बच्चे नहीं मिले। इसलिए 14 नवंबर 2016 को होने वाली लांचिंग ऐन वक्त पर टालनी पड़ी। पूर्व की तैयारियों के अनुसार विभाग संभावित आंकड़ों के हिसाब से छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने 86 हजार ग्लूकोमीटर खरीद लिए थे। इनमें से सिर्फ 500 इस्तेमाल हुए हैं।

पीड़ितों की पहचान हो रही है

टाइप-1 पीड़ित बच्चों को ढूंढ़ने की जिम्मेदारी जिला सीएमएचओ, सिविल सर्जन को दी गई है। आरबीएसके के तहत होने वाली जांच में भी पीड़ितों की पहचान हो रही है। लक्ष्य 3 हजार तक पहुंचना है। इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. केसी उराव, राज्य नोडल अधिकारी, बाल मधुमेह योजना, स्वास्थ्य विभाग
 

Source:Agency