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अंधत्व मुक्त बनेगा छत्तीसगढ़, 241 मरीजों में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

By Mantralayanews :30-11-2017 08:59


रायपुर । छत्तीसगढ़ साल 2018-19 में अंधत्व मुक्त (कॉर्नियल ब्लाइंडनेस फ्री) राज्य बन जाएगा। इस महाअभियान के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें संपूर्ण अंधेपन के शिकार व्यक्तियों की खोज की जा रही है। अब तक 242 लोगों की पहचान हो चुकी है।

मार्च 2018 तक यह आंकड़ा 300 के पार हो सकता है। सरकारी, निजी आईं बैंकों को दान में मिले कॉर्निया इन लोगों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा। यानी मृत व्यक्तियों के परिजन की काउंसिलिंग कर नेत्रदान कराने के लिए काउंसलर नियुक्ति किए जा रहे हैं। यह प्रोजेक्ट लोगों के अंधकार भरे जीवन में रोशनी की नई किरण लेकर आएगा।

इससे पहले यह प्रयास पंजाब में हो चुका है, जहां बड़ी संख्या में कॉर्निया ट्रांसप्लांट करवाए गए। छत्तीसगढ़ इस प्रोजेक्ट को शुरू करने वाला दूसरा राज्य होगा। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सत्र 2018-19 लक्ष्य लेकर योजना बनाई गई है। हालांकि छत्तीसगढ़ में रोजाना हो रही मृत्यु के अनुपात में कम नेत्रदान होते हैं जो चिंता का विषय है, इसे लेकर जागरूकता अभियान चलाने की रूपरेखा भी बनाई जा रही है।

नेत्रदान के लिए क्या करें

मृत्यु होने के तत्काल बाद अंबेडकर अस्पताल और शहर के 3 निजी आई बैंक से संपर्क करें। यहां से डॉक्टर या आई टेक्नीशियन पहुंचेंगे और आंख नहीं कॉर्निया निकालकर ले जाएंगे। कॉर्निया अगर ठीक रहता है तो इसे ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल में लाया जाता है, नहीं तो मेडिकल छात्र इसे बतौर प्रैक्टिकल इस्तेमाल करते हैं। सतप्रतिशत नेत्रदान का कॉर्निया ट्रांसप्लांट संभव नहीं है।

मृत्यु के 6 घंटे तक सुरक्षित रहती है आंख

विशेषज्ञों के मुताबिक मृत्यु के छह घंटे तक ही कॉर्निया सुरक्षित रहती है, उसके बाद उसकी उपयोगिता नहीं होगी। 24 घंटे में कॉर्निया मृत व्यक्ति की आंख से निकालकर आई बैंक पहुंच जानी चाहिए और 7 दिन में कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो जाना चाहिए। वर्तमान में 312 लोगों के नाम आई बैंकों में पंजीकृत हैं, जिनका कॉर्निया ट्रांसप्लांट होना है।

इन्हें मिलती है प्राथमिकता

पहला- ऐसा व्यक्ति जिसकी दोनों आंखें नहीं हैं, यानी पूरी तरह से वह अंधेपन का शिकार है। दूसरा- जिसकी उम्र 50 साल से कम हो या फिर रजिस्टर्ड मरीजों में तुलनात्मक कम हो। तीसरा- ट्रांसप्लांट से परिणाम जिनमें दूसरों की तुलना में बेहतर हो सकते हों।

प्रयासों से लक्ष्य हासिल होगा

प्रोजेक्ट तैयार है, जिसे लेकर शीर्ष अधिकारियों से चर्चा हो चुकी है। केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा, उनकी तरफ से भी अनुदान मिलेगा। सभी के प्रयास से लक्ष्य हासिल किया जाएगा। निजी आई बैंकों को इसमें जोड़ा जाएगा। राज्य को अंधत्व मुक्त बनाना है। डॉ. सुभाष मिश्रा, राज्य नोडल अधिकारी, अंधत्व निवारण समिति
 

Source:Agency