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चौथी तक पढ़ी बोल्ड इमेज वाली इस एक्ट्रेस की मौत आज भी रहस्य

By Mantralayanews :02-12-2017 06:26


अपनी बोल्ड इमेज के कारण मशहूर रहीं दक्ष‍िण की अभिनेत्री सिल्क स्म‍िता के जिंदगी के कई राज आज भी अनसुलझे हैं. उन पर बनी फिल्म 'डर्टी पिक्चर' ने सिल्क की जिंदगी पर रोशनी डाली. सिल्क स्म‍िता 2 दिसंबर, 1960 को जन्मी थीं. जानिए उनकी जिंदगी की दिलचस्प कहानी.
 अस्सी के दशक में दक्षिण भारतीय सिनेमा में सिल्क स्मिता की शोहरत का ये आलम था कि हिंदी सिनेमा भी उसे उस वक्त अपनाने के मोह से खुद को बचा नहीं पाया. इसी क्रेज और सिल्क के रहस्यों से प्रभावित होकर मिलन लूथरिया ने विद्या बालन को मुख्य भूमिका में लेकर उन पर फिल्म डर्टी पिक्चर बनाई थी.
आंध्र प्रदेश में राजमुंदरी के एल्लुरू में जन्मी विजयालक्ष्मी  पहले स्मिता बनी और फिर सिल्क स्मिता.  उस दौर की कोई भी फिल्म वितरक तभी खरीदते थे जब उसमें कम से कम सिल्क स्मिता का एक गाना जरूर हो.
अपने दस साल के छोटे से करियर में करीब पांच सौ फिल्मों में काम करने वाली सिल्क स्मिता का परिवार इतना गरीब था कि घर वाले उसे सरकारी स्कूल में भेजने तक का खर्च उठाने में नाकाम रहे.
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चौथी तक पढ़ी बोल्ड इमेज वाली इस एक्ट्रेस की मौत आज भी रहस्य 
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चौथी क्लास में पढ़ाई छूटी और पहला काम स्मिता को मिला फिल्मों में मेकअप असिस्टेंट का. स्मिता शूटिंग के दौरान हीरोइन के चेहरे पर शॉट्स के बीच टचअप का काम किया करती और यहीं से उसकी आंखों में पलने शुरू हुए ग्लैमर के आसमान पर चांद की तरह चमकने के सपने.
जिस हीरोइन का वो टचअप किया करती थी, उसी के खैरख्वाह फिल्मेकर से उसने दोस्ती की पींगें बढ़ाईं और 1979 में मलयालम फिल्म इनाये थेडी में पहली बार लोगों ने परदे पर देखी एक ऐसी लड़की जो गोरी नहीं थी, छरहरी नहीं थी, जिसकी अदाओं में शराफत नहीं थी और जिसकी आंखें आम लड़कियों की तरह शर्म से झुकती नहीं थी.
स्मिता को करियर का बड़ा ब्रेक मिला 1980 में रिलीज हुई फिल्म वांडी चक्रम में. उसमें उन्होंने अपने किरदार को खुद डिजाइन किया और मद्रासी चोली को फैशन स्टेटमेंट बना दिया.इस फिल्म तक उनका नाम सिर्फ स्मिता ही था, लेकिन फिल्म में अपने किरदार सिल्क को मिली शोहरत को उन्होंने अपने साथ जोड़ते हुए अपना नाम सिल्क स्मिता कर लिया.
उन्होंने सिल्क, सिल्क, सिल्क नाम की एक फिल्म में लीड रोल भी किया. 1980 से 1983 का दौर सिल्क स्मिता के करियर वो दौर था जिसमें उन्होंने करीब 200 फिल्में की.
एक दिन में तीन तीन शिफ्टों में काम किया और एक एक गाने की कीमत 50 हजार रुपये तक वसूली.  यही वो दौर था जब पूरी फिल्म बना लेने के बाद भी निर्माता सिर्फ उनके एक गाने के लिए अपनी फिल्मों की रिलीज महीनों तक रोके रहते थे.
सिल्क स्मिता की शोहरत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिवाजी गणेशन से लेकर रजनीकांत, कमल हासन और चिरंजीवी तक की फिल्मों में उनका कम से कम एक गाना उस वक्त की जरूरत बन चुका था. मसाला फिल्मों के निर्देशकों पर चल चुके इस जादू ने लीक से हटकर फिल्में बनाने वाले निर्देशकों बालू महेंद्रा और भारती राजा को भी अपनी चपेट में लिया.
बालू महेंद्रा ने सिल्क स्मिता को अपनी फिल्म मूरनम पिराई में खास रोल दिया और इसे जब उन्होंने हिंदी में सदमा के नाम से बनाया तो सिल्क स्मिता को उसमें भी रिपीट किया. जितेंद्र-श्रीदेवी और जितेंद्र-जया प्रदा की हिंदी फिल्मों के इसी दौर में सिल्क स्मिता ने हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया.
सदमा रिलीज होने के ठीक महीने भर पहले वो जीत हमारी नाम की फिल्म के जरिए मायानगरी के निर्माताओं को अपने हुस्‍न का जलवा दिखा चुकी थीं.शोहरत के दौर में अपने निजी जीवन को संतुलित न रख पाने की कीमत उन्हें करियर के ढलान पर आते ही चुकानी पड़ी.
सिल्क स्मिता के एक करीबी मित्र उन्‍हें फिल्म निर्माता बनने का लालच दिखाया. सिर्फ दो फिल्मों के निर्माण में ही उन्हें दो करोड़ रुपये का घाटा हो गया. स्मिता की  तीसरी फिल्म शुरू तो हुई पर कभी पूरी नहीं हो सकी.
बैंक में घटती रकम और एक स्टार की जीवनशैली कायम रखने के दबाव ने सिल्क स्मिता को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर कर दिया.
23 सितंबर 1996 को उनकी लाश उनके ही घर में पंखे से झूलती पाई गई. पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला मानते हुए ये केस बंद कर दिया, हालांकि ऐसे भी लोगों की कमी नहीं है जो इसे हत्या का मामला मानते हैं और इसके पीछे एक बड़ी साजिश की आशंका जताते रहे हैं.

Source:Agency