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भोपालपट्नम के किसान 18 करोड़ का धान महाराष्ट्र में बेचने को विवश

By Mantralayanews :02-12-2017 07:46


भोपालपटनम। एक ओर जहां पड़ोसी प्रदेशों का धान छत्तीसगढ़ में लाकर बेचने के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भोपालपटनम के कई गांवों के किसान महाराष्ट्र के कोचियों के पास धान बेचने को मजबूर हैं।

यहां से करीब 70 किमी दूर व पहाड़ी रास्ता होने के कारण वे फसल यहां तक नहीं ला पाते। इसके चलते करीब 6 हजार एकड़ का 18 करोड़ का धान महाराष्ट्र चला जाता है, वह भी औने-पौने दाम में। इतना ही नहीं, यहां के किसान धान बोनस के लाभ से भी वंचित रह जाते हैं।

उम्मीद सिर्फ इतनी कि सरकार ऐसी व्यवस्था बना दे कि वे यही अपनी फसल बेच सकें। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक भोपालपटनम के सुदूर ग्राम पंचायत एड़ापल्ली में 1132, केरपे में 1295, बड़ेकाकलेड़ में 2223 व सेण्ड्रा में 1292 एकड़ कृषि भूमि है।

प्रति एकड़ औसतन 20 क्विंटल धान फसल का भी अनुमान लगाएं तो करीब 1.20 लाख क्विंटल धान का उत्पादन यहां के किसान हर साल करते हैं। समर्थन मूल्य के हिसाब से इसकी कीमत निकाली जाए तो यह राशि 18 करोड़ तक पहुंच जाती है।

यहां के किसानों की मजबूरी का फायदा महाराष्ट्र के कोचिए उठाते हैं। सेण्ड्रा के पटवारी कपिल नेताम की मानें तो इस गांव में बड़े किसान भी हैं। मड़े शंकर व कुरसम दसा के पास क्रमश: 35 व 27 एकड़ जमीन है। इस पंचायत में केवल एक ही किसान गुरला निमैया का पंजीयन सोसायटी में है।

उनके पास साढ़े 6 एकड़ जमीन है। एड़ापल्ली के पटवारी संतूराम धारूव के मुताबिक इस पंचायत में एक भी किसान ने पंजीयन नहीं कराया है। दोनों पटवारियों ने बताया कि उन्होंने कई बार किसानों को समझाइश दी, लेकिन वे नहीं मानते। आधार कार्ड व बैंक खाते खोलने की समझाइश भी वे कई बार दे चुके हैं।

इसके अभाव में किसान सूखा राहत, बोनस जैसी सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं। सेण्ड्रापारा कैंप के कावरे शंकर, सुशीला एलादी व अना वासम भी अपना धान महाराष्ट्र में बेचते हैं।
 

Source:Agency