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सांसद-विधायकों की भी नहीं सुन रही सरकार

By Mantralayanews :03-12-2017 09:16


भोपाल। तीन सांसद, 50 विधायकों के लिखित विरोध के बाद भी राज्य सरकार 'मप्र सचिवालय (चतुर्थ श्रेणी) सेवा भर्ती नियम 1987" में बदलाव को तैयार नहीं है। ये नियम मंत्रियों की निजी स्थापना में पदस्थ कर्मचारियों को मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर बैकडोर एंट्री दिलवाते हैं। गोंडवाना महासभा ने विधानसभा की याचिका समिति से भी गुहार लगाई है, लेकिन समिति दो साल में मामले की सुनवाई तक नहीं कर पाई है।

31 साल में 1150 से ज्यादा कर्मचारी मंत्रियों की निजी स्थापना में आए और बैकडोर से मंत्रालय में चपरासी बन गए। इन कर्मचारियों को मंत्रालय में पदस्थ होते ही नियमित कर्मचारियों के समान वेतनवृद्धि एवं अन्य सुविधाएं दी गई हैं। नरसिंहपुर के उत्कर्ष वाजपेयी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।

उधर, प्रदेश के सांसद और विधायकों ने भी लिखित में इस नियम का विरोध किया है। इनमें से दो विधायक वर्तमान में मंत्री हैं। इनका मानना है कि अवसरों की समानता का अधिकार सभी को मिलना चाहिए। वे मंत्रालय में खुली प्रतियोगिता के माध्यम से भृत्यों की भर्ती के पक्षर हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में विधानसभा की याचिका समिति ने आमजनता के मामले भी सुनने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री को 16 कर्मचारी रखने के अधिकार 

यह नियम मुख्यमंत्री को 16 और मंत्रियों को बंगले पर काम के लिए सात-सात कर्मचारी निजी स्थापना में रखने के अकिार देता है। इन्हें बाद में एक परीक्षा लेकर मंत्रालय में भृत्य बना दिया जाता है। इसमें योग्यता का भी कोई पैमाना नहीं है। बस, कर्मचारी मंत्री की पसंद का होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं माने अफसर 

सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी नहीं मान रहा है। कोर्ट ने वर्ष 2006 में उमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार प्रकरण में सरकारी भर्ती में सभी को समानता का अधिकार देने का फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि जो नियुक्तियां खुली प्रतियोगिता से नहीं होती हैं, वे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिए थे कि जहां कहीं भी ऐसी विसंगति है, उसे संशोधित कर लिया जाए। फिर भी 10 साल में जीएडी ने कोई कार्रवाई नहीं की।

इन सांसद, मंत्री, विधायक ने लिखा पत्र

सांसद मनोहर ऊंटवाल, ज्ञान सिंह, मंत्री गौरीशंकर बिसेन, अर्चना चिटनिस, विधायक जतन उईके, चंदन सिंह सिसोदिया, हरदीप सिंह डंग, दिलीप सिंह परिहार, तरुण भनोत, सुशील तिवारी, डॉ. कैलाश जाटव, संजय शर्मा, मुरलीर पाटीदार, जालमसिंह पटेल, सुरेंद्र सिंह हनी, रामपाल सिंह ब्यौहारी, कमल मर्सकोले, गिरीश भंडारी, आरिफ अकील, प्रताप सिंह जबेरा, स्व. सत्यदेव कटारे, निरंजन खंपरिया सहित अन्य विधायक शामिल हैं। इनके पत्रों को जीएडी ने कार्रवाई में लिया है।

सेक्शन ऑफिसर तक पहुंच गए कर्मचारी 

ये कर्मचारी मंत्री की निजी स्थापना से मंत्रालय में भृत्य और पदोन्न्ति पाकर सेक्शन ऑफिसर तक बन गए। वर्तमान में डेढ़ दर्जन से ज्यादा कर्मचारी वरिष्ठ अफसरों के निज सचिव हैं। जबकि दो सौ से अधिक कर्मचारी लिपिक बन चुके हैं।

हमने विभाग से जानकारी मांगी है 

तय प्रक्रिया के तहत हमने संबंधित विभाग से जानकारी मांगी है। जानकारी अभी आई या नहीं, यह देखना पड़ेगा। यदि आ गई होगी तो याचिका समिति के सामने जल्द ही रख दी जाएगी - अवेश प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव, विधानसभा

नहीं हुई सुनवाई

दो साल पहले सुनवाई के लिए मामला लगाया था। विधानसभा से अब तक कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है - शुक्लू सिंह आहके, अध्यक्ष, गोंडवाना महासभा मप्र
 

Source:Agency