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Rera पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई मुहर, कानून को बताया सही

By Mantralayanews :07-12-2017 06:01


मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने रियल इस्टेट क्षेत्र को अनुशासित व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लाए गए रियल इस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (रेरा) की वैधानिकता को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि रेरा कानून का उद्देश्य रियल इस्टेट क्षेत्र को विकसित करना है। इसके साथ ही यह कानून देश भर में फ्लैट खरीदारों के हितों को संरक्षण प्रदान करेगा। देश भर में अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के काम में तेजी आएगी। इसके साथ ही खंडपीठ ने डीबी रियल्टी सहित कई भवन निर्माताओं की ओर से रेरा कानून के विभिन्न प्रावधानों की वैधानिकता को चुनौती देनेवाली याचिकाएं खारिज कर दीं।
न्यायमूर्ति नरेश पाटील व न्यायमूर्ति राजेश केतकर की खंडपीठ ने कहा कि समस्याएं तो बहुत हैं, पर अब समय आ गया है कि हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपने को साकार करें और हर आंख के आंसू पोंछें। खंडपीठ ने यह फैसला रेरा कानून के विभिन्न प्रावधानों की वैधानिकता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुनाया। यह याचिका डीबी रियल्टी सहित कई भवन निर्माताओं की ओर से दायर की गई थी। खंडपीठ ने कहा कि रेरा कानून का उद्देश्य बिल्डरों को नियंत्रित करना नहीं बल्कि इसका लक्ष्य रियल इस्टेट क्षेत्र को विकसित करना है। 

ये कहा अदालत ने
- रेरा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाया गया प्राधिकरण व ट्रिब्यूनल प्रोजेक्ट में विलंब के हर मामले को स्वतंत्र रूप से देखे। यदि इमारत के निर्माण में देरी अनियंत्रित कारणों के चलते होती है तो इसके लिए उसका पंजीयन रद्द न किया जाए और न ही उसे दंडित किया जाए। ऐसी स्थिति में भवन निर्माता को एक साल का समय दिया जाए। 
- ट्रिब्यूनल में प्रशासकीय अधिकारी (ब्यूरोक्रेट) नहीं बल्कि न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए। ज्यादातर सदस्य न्यायपालिका के होने चाहिए।
- यदि प्रोजेक्ट में देरी होती है तो बिल्डर को फ्लैट खरीदार को मुआवजा देना पड़ेगा। यदि देरी प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों के चलते होती है तो रेरा प्राधिकरण हर मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार करेगा और सभी पहलूओं पर विचार करने के बाद डेवलपर को एक साल का समय प्रदान करेगा।

Source:Agency