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BHU के MA के पेपर में 'चाणक्य के अर्थशास्त्र मे GST के स्वरूप' पर सवाल

By Mantralayanews :07-12-2017 06:02


15-15 नंबर के ये सवाल बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के एमए (मास्टर ऑफ ऑर्ट्स) के पॉलिटिकल साइंस के पेपर में पूछे गए हैं. हालांकि छात्रों का कहना है कि 'प्राचीन और मध्यकालीन भारत में सामाजिक और राजनीतिक विचार' के तहत ये टॉपिक्स उनके कोर्स का हिस्सा नहीं हैं. पेपर तैयार करने वाले प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा ने कहा, 'हमने इस पर विचार किया और पाया कि दोनों विचारकों के दर्शन को नए उदाहरणों जैसे जीएसटी और ग्लोबलाइजेशन के जरिए छात्रों को पढ़ाया जाए.'

उन्होंने कहा, 'यह मेरा विचार था कि छात्रों को इन उदाहरणों से परिचित कराया जाए. अगर ये किताब में नहीं हैं तो क्या हुआ? क्या ये हमारा दायित्व नहीं है कि पढ़ाने के नए तरीके खोजे जाएं.'

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक छात्र ने कहा, 'सर ने हमें प्रश्न का जवाब लिखवाया था और कहा था कि ये सवाल पेपर में निश्चित तौर पर आएंगे. ये टॉपिक्स हमारे टेक्सटबुक का हिस्सा नहीं है, लेकिन हमने नोट्स लिए थे.'

लेकिन बीएचयू से जुड़े कॉलेजों के छात्रों का कहना है कि उन्हें इन सवालों के जवाब नहीं पढ़ाए गए हैं और ये उनके कोर्स का हिस्सा भी नहीं है.

'कौटित्य के अर्थशास्त्र में GST का संकेत'

प्रोफेसर मिश्रा के मुताबिक कौटिल्य (चाणक्य) का अर्थशास्त्र पहली भारतीय किताब है जो जीएसटी के वर्तमान स्वरूप का संकेत देती है. जीएसटी का प्राथमिक कॉन्सेप्ट है कि उपभोक्ता को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिलना चाहिए. जीएसटी का मतलब है कि देश की इकोनॉमी और वित्तीय व्यवस्था एक समान और एकीकृत होनी चाहिए. कौटिल्य पहले विचारक थे जिन्होंने राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को एकीकृत बनाने का विचार दिया. मालूम हो कि कौटिल्य को ही चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है.

उन्होंने कहा, 'वास्तव में कौटिल्य ने ही अपने समय में विचार दिया था कि घरों की निर्माण सामग्री पर टैक्स की दर 20 प्रतिशत, सोने और अन्य धातुओं पर 20 प्रतिशत, सीमा शुल्क 20 प्रतिशत, बगीचों पर 5 प्रतिशत, नृत्य और कलाकारों पर 50 प्रतिशत टैक्स होना चाहिए.'

मिश्रा ने अपने छात्रों को बताया है कि मनु ही पहले विचारक थे जिन्होंने दुनिया को ग्लोबलाइजेशन की परंपरा से रूबरू कराया. उन्होंने कहा, 'नीत्शे ने इस बारे में खूब लिखा है और मनु की आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक सिद्धांतों की तारीफ की है. मनु के विचार दुनिया भर में फैले और कई देशों ने इसे अपनाया. धर्म, भाषा और राजनीति पर मनु के विचारों के सबूत चीन, फिलिपीन्स, न्यूजीलैंड में मिले हैं. वे कहते हैं कि न्यूजीलैंड में 'मानव' शब्द को मनु से लिया गया है.'

RSS के सदस्य हैं प्रोफेसर मिश्रा

प्रोफेसर मिश्रा बीएचयू में सोशल साइंस की फैकल्टी के तहत भारतीय राजनीतिक व्यवस्था और भारतीय राजनीतिक विचार पढ़ाते हैं. मिश्रा ने इस बात को स्वीकार किया कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि ये निजी मत है और छात्रों को वे जो कुछ पढ़ाते हैं, उससे कोई लेना देना नहीं है.

विभाग के प्रमुख आरपी सिंह ने इस बात को खारिज कर दिया कि पूछे गए सवाल सिलेबस के बाहर के थे. उन्होंने कहा कि कोई भी टीचर अपनी विशेषज्ञता वाले क्षेत्र से जुड़े सवाल ही पेपर में सेट करता है. कोई भी टीचर अपनी विशेषज्ञता और जो पढ़ाता है उससे बाहर के सवाल नहीं पूछता.
 

Source:Agency