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भारत का एजुकेशन सिस्टम रोजगार देने में नाकाम : प्रो.गहलोत

By Mantralayanews :05-01-2018 07:36


बिलासपुर। प्रिंस्टन न्यू जर्सी,यूएस से पहुंचे अतिविशिष्ट अतिथि प्रोफेसर नारायण गहलोत ने कहा कि भारत का एजुकेशन सिस्टम रोजगार देने में अक्षम है। मोदी सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का संवर्धन और बदलाव करने में पहल करे।

बिलासपुर विश्वविद्यालय के बिलासा सभागार में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रो.गहलोत ने यह भी कहा कि 30 से अधिक रिसर्च उनका पेटेंट है। भारत में इतनी क्षमता है कि वह चाइना को आसानी से पछाड़ सकता है। केंद्र सरकार को इस दिशा में सकारात्मक पहल करने की जरूरत है। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।

प्रो.गहलोत का कहना था कि सरकार को कुछ समय पहले एजुकेशन सिस्टम से नौकरी के लिए आइडियाज देने 5.50 करोड़ का प्रोजेक्ट भी प्रस्तुत किया था। इसमें तीन साल के भीतर भारत में तीन करोड़ नौकरी युवाओं को मिलती। इस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। बिना फंडिग के विकास मुश्किल है। शिक्षा के क्षेत्र में क्वालिटी लाने को संसाधन और सुविधा बढ़ानी होगी। ऑनलाइन डिजीटल सिस्टम लागू करने के बाद चुनौती और बढ़ गई है।

सम्मेलन में परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग आदि कई बिंदुओं पर विद्वानों ने सुझाव दिया। सम्मेलन में तकनीकी सत्र में शिक्षा में नवाचार, नए परिवेश में महिला सशक्तीकरण, शिक्षा में महिलाओं की चक्रवृद्धि विकास क्षेत्र रुकावटें, वैदिक कालीन शिक्षा एक अनुकरणीय तथ्य, भारत में शिक्षा की समस्या एवं समाधान एक समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।

अनुदान रोकना चिंता का विषय: भूषण

डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन एंड प्रोफेशनल एजुकेशन न्यूपा नई दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर सुधांशु भूषण ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सेन्ट्रल और स्टेट गवर्नमेंट को फंडिंग बढाने की जरूरत है। बिना अनुदान के किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान का विकास आसान नहीं होगा। सरकार ने वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में अनुदान रोक दिया है जिसके चलते समस्या हो रही है। यूजीसी द्वारा नए सत्र से ऑनलाइन कोर्स शुरू करने पहल की गई है। हालांकि अब तक ऑनलाइन कोर्स से क्वालिटी को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सम्मेलन में दस बिन्दुओं पर बल

00 उच्च शिक्षण संस्थानों की ऑटोनोमी में तब्दीली।

02 गुणवत्ता सुधार की दिशा में निरीक्षण व निगरानी।

03 रैंकिंग व्यवस्था में और सुधार की जरूरत है।

04 नेट एक्रीडेशन के लिए कॉलेज को प्रोत्साहित करना।

05 शोध की गुणवत्ता पर नजर रखने बोर्ड ऑफ सुपरवाइजर्स हो

06 कुलपतियों को कमिटमेंट व लीडरशिप पर जोर।

07 टीचरों पर भी निगरानी,रिफ्रेशर कोर्स पर बल।

08 ऑनलाइन टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से बढना होगा।

09 रिसर्च और इनोवेशन में सुधार की जरूरत है।

10 एजुकेशन सिस्टम में सुरक्षा पर भी बल देना होगा।

है।
 

Source:Agency