Breaking News

Today Click 47

Total Click 3611905

Date 20-04-18

बजट मे TAX छूट की सीमा बढ़ा सकतीहै सरकार,टैक्स स्लैब मे भी होंगे बदलाव

By Mantralayanews :10-01-2018 06:38


आरसी ब्यूरो, दिल्ली। केंद्र सरकार और वित्त मंत्री अरुण जेटली आगामी बजट सत्र में आम लोगों को बड़ी राहत देने की सोच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अरुण जेटली साल 2018-19 के आम बजट में टैक्स छूट के साथ ही टैक्स स्लैब में भी बदलाव कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि सरकार व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा को मौजूदा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने की योजना बना रही है। गौतलब है कि सरकार से आयकर में छूट की सीमा को 5 लाख तक बढ़ाने की मांग काफी समय से की जा रही है। ऐसे में चुनाव से पहले वित्त मंत्रालय लोगों को ये बड़ा तोहफा दे सकता है।

10 लाख सालाना इनकम पर 10 फीसदी हो सकता है टैक्स-

बता दें कि साल 2018-19 का आम बजट नरेंद्र मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। चुकि इस बजट के बाद लोक सभा के चुनाव होने हैं इसलिए समझा जा रहा है कि सरकार मध्यम वर्ग को, जिसमें ज्यादातर वेतनभोगी तबका आता है, बड़ी राहत देने पर सक्रियता के साथ विचार करेगी। सरकार ने जीएसटी में छुट देने के बाद से ही ये दर्शाया है कि देश के आम लोगों को खुदरा मुद्रास्फीति के प्रभाव से राहत मिलनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार अभी से लगभग बीस दिन बाद एक फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा पेश किये जाने वाले बजट में टैक्स स्लैब में भी व्यापक बदलाव किये जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि सरकार पांच से दस लाख रुपये की सालाना आय को दस प्रतिशत टैक्स दायरे में जबकि 10 से 20 लाख रुपये की आय पर 20 प्रतिशत और 20 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय पर 30 प्रतिशत टैक्स की दर का स्लैब पेश कर सकती है।

सीआईआई ने टैक्स में छूट का किया समर्थन-

सीआईआई ने बजट से पहले दिए ज्ञापन में टैक्स में छूट और टैक्स स्लैब में बदलाव पर जोड़ दिया है। मंडल ने कहा कि मुद्रास्फीति की वजह से आम लोगों के जीवनयापन की लागत में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में सरकार को आगामी बजट में निम्न और मध्य आय वर्ग को राहत पहुंचाने के लिए आयकर छूट सीमा बढ़ाने के साथ अन्य टैक्स स्लैबों में भी बदलाव करना चाहिए। वहीं मंडल ने कंपनियों के लिए कंपनी कर की दर को भी 25 प्रतिशत करने की मांग की है। वैसे माना जा रहा है कि सरकार के द्वारा किये गए हाल में वित्तीय सुधार की वजह से राजकोषीय दबाव के कारण इस मांग को पूरा करना मुश्किल है। गौतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद सरकार की अप्रत्यक्ष कर वसूली पर दबाव बढ़ा है।
 

Source:Agency