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कलेक्टर बनकर रूतबा देखा, फिर भी बोली मैं तो डॉक्टर बनूंगी

By Mantralayanews :10-01-2018 07:47


कोरबा। कोरबा कलेक्टर की सीट पर मुस्कान भावनानी बैठी हुई थी और नजदीक में कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक खड़े थे। पूरे दिन कलेक्टर के साथ प्रशासनिक कामकाज का अनुभव लेने के बाद घर जाने से पहले कलेक्टर अपनी सीट से खड़े हो गए और एक दिन के शेडो कलेक्टर मुस्कान को अपनी सीट पर बैठाया।

खास बात तो यह रही कि पूरे दिन एक कलेक्टर के रूतबे का अंदाजा लगाने के बाद भी मुस्कान ने घर लौटते वक्त बड़े ही सरल अंदाज में यह कह दिया कि वह कलेक्टर नहीं डॉक्टर बनकर दिन दुखियों का सेवा करना चाहती है।

एक दिन की शेडो कलेक्टर मुस्कान को लेने सुबह उसके पाली आवास में ही प्रशासनिक गाड़ी पहुंच गई थी। वह पाली से अपने पिता गोविंद भावनानी के साथ कलेक्टर आवास पहुंची। कलेक्टर उसे अपने साथ कलेक्टोरेट ले गए, जहां से प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हुई। मुस्कान सबसे पहले कलेक्टर के साथ मुड़ापार स्थित अंकुर स्कूल के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुई, जहां बच्चों को उत्साहवर्धन किया।

यहां से वापस कलेक्टर की ली जाने वाली प्रधानमंत्री आवास की समीक्षा बैठक में शामिल हुई। समीक्षा के दौरान किस तरह से जानकारी ली जाती है, इसकी बारीकियों को जाना। दोपहर का लंच कलेक्टर के आवास में उनके साथ टेबल में बैठकर किया। एजुकेशन प्रोग्रेस के लिए कोरबा कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक की अपनी अलग पहचान है।

उनके साथ दिन भर काम कर मुस्कान के चेहरे पर ऐसी मुस्कान रही, जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगी। सरकारी योजनाओं की बारीकियों को उसने करीब से जाना। मुस्कान ने कहा कि यह उनकी जिंदगी का बेहतरीन लमहा है, जिसे वह संजोकर रखेगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उसका लक्ष्य कलेक्टर बनना नहीं बल्कि डॉक्टर बनकर जनसेवा करना है। पाली के शासकीय महाविद्यालय में बीएससी प्रथम वर्ष में बायोलॉजी विषय लेकर अध्ययनरत्‌ मुस्कान भावनानी प्रारंभ से ही मेधावी रही है। उसके पिता गोविंद भावनानी व्यवासायी व माता उषा भावनानी हाउस वाइपᆬ है। छोटा भाई मोहित भावनानी कक्षा दसवीं का छात्र है।

जिंदगी का बेहतरीन लमहा

दिन भर कलेक्टर के रूप में काम कर मुस्कान के चेहरे पर ऐसी मुस्कान रही, जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगी। सरकारी योजनाओं की बारीकियों को उसने करीब से जाना। मुस्कान ने कहा कि यह उनकी जिंदगी का बेहतरीन लमहा है, जिसे वह संजोकर रखेगी।

इसके साथ ही उसने कहा कि कलेक्टर का जितना बड़ा नाम होता है, उतना बड़ा काम इस पद पर रहकर काम करना उतना आसान नहीं, जितना बाहर से नजर आता है। मैंने अनुभव किया है कि सरकार की इतनी सारी योजनाएं हैं, जिस पर कलेक्टर जितना चाहे, उतना काम कर सकता है, केवल इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

सरकारी स्कूल में पढ़कर बनाया मान

सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राएं भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं, इस बात को मुस्कान ने कर दिखाया है। मुस्कान के पिता गोविंद भावनानी ने बताया कि मुस्कान प्रारंभ से ही मेधावी रही है। वह हर कक्षा को अव्वल दर्जे में उत्तीर्ण किया है।

मुस्कान की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा भले ही निजी स्कूल में हुई किंतु उसने उच्च कक्षा 9वीं से बाहरवीं की पढ़ाई पाली के ही सरकारी स्कूल में उत्तीर्ण की है। अब वह आगे की पढ़ाई पाली कॉलेज में जारी रखते हुए मेडिकल में जाने के लिए पीएमटी की तैयारी कर रही है।

बेटी ने मेरा सीना चौड़ा कर दिया

मुस्कान को लेने आज सुबह जिला पंचायत सीईओ की गाड़ी पहुंची तो उसके परिजन आरती उतारकर मुस्कान को गाड़ी तक सीऑफ किया। पिता गोविंद का कहना है कि वे बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे। बेटी ने उनका सीना चौड़ा कर दिया है। वह भले ही डॉक्टर बनना चाहती है, पर आज के दिन को हम कभी नहीं भूल सकेंगे।
 

Source:Agency