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व्यापम घोटाले में CBI उमा भारती को दे सकती है क्लीनचिट, नहीं मिले सबूत

By Mantralayanews :11-01-2018 07:59


भोपाल। सीबीआई ने व्यापम घोटाले की जांच तीन साल पहले अपने हाथ में ली थी। अब उसे अपनी जांच में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि उनकी इस मामले में किसी भी तरह की भागीदारी रही थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में जांचकर्ताओं की राय अलग है। मगर वरिष्ठों ने हस्तक्षेप किया और सभी के भ्रम को दूर कर दिया है। बता दें कि उमा भारती ही वह शख्स थी, जिन्होंने साल 2014 में कहा था कि व्यापम घोटाला चारा घोटाले से बड़ा है।

इसके बाद उन्होंने ही इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के लिए दबाव बनाया था। उसी साल राज्य कांग्रेस ने उन पर ही इस घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था। उन्होंने इस मामले में अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। भारती का कहना था कि विपक्ष के नेता इस घोटाले में शामिल है इसी वजह से वे लोगों को भटकाने का काम कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश में मेडिकल दाखिला परीक्षा पीएमटी-2012 में हुए घोटाला मामले में सीबीआई ने 23 नवंबर को व्यापम के चार पूर्व अधिकारियों समेत 592 आरोपियों के खिलाफ स्पेशल जज डीपी मिश्रा की कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी।

कोर्ट में पेश की गई सीबीआई चार्जशीट में व्यापम के चार पूर्व अधिकारियों का नाम भी शामिल थे। आरोपियों की सूची में व्यापम के तत्कालीन निदेशक पंकज त्रिवेदी, तत्कालीन वरिष्ठ सिस्टम एनालिस्ट नितिन मोहिन्द्रा, तत्कालीन डिप्टी सिस्टम एनालिस्ट अजय कुमार सेन और तत्कालीन प्रोग्रामर सीके मिश्रा के नाम दर्ज थे।

हाईकोर्ट ने मामले में शुरुआती सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी में कहा था कि मेडिकल कॉलेज के संचालकों के कृत्यों और व्यापम जैसे बड़े घोटाले की वजह से हजारों योग्य छात्र मेडिकल सीटों पर दाखिले से वंचित हो गए और अयोग्य छात्र पैसे के बल पर सीट हासिल करने में कामयाब हो गए। कोर्ट ने कहा कि दाखिले की पूरी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी, जिसके शिकार योग्य उम्मीदवार बने। यह बेहद चिंताजनक बात है।
 

Source:Agency