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मैनिट : चहेतों को उपकृत करने डायरेक्टर ने नियमों को रखा ताक पर

By Mantralayanews :01-04-2018 06:23


-रिटायरमेंट लेने के बाद भी जमे हैं प्रोफेसर

-मामले में पीएमओ और एमएचआरडी ने किया जवाब-तलब

मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एक प्रोफेसर की घर वापसी को लेकर लंबे समय से सुर्खियों में है। यह विवाद डीन स्टूडेंटस वेलफेयर डॉ आशुतोष शर्मा की मैनिट वापसी को लेकर है। वह वीआरएस लेने के बावजूद मैनिट में नियम विरुद्ध नौकरी कर रहे हैं। संस्थान में बोर्ड आॅफ गर्वनर (बीओजी) की पूर्व चेयरपर्सन गीता बाली की आखिरी की बैठक में इस मामले में बड़ा फैसला होना था। लेकिन शर्मा को बचाने के लिए डायरेक्टर नरेन्द्र सिंह रघुवंशी ने इस मामले को ऐन केन प्रकारेण आगे बढ़ा दिया। अब चेयरपर्सन गीता बाली के जाने के बाद शर्मा के सिर से खतरा टल गया है, लेकिन नए बीओजी के नए चेयरमैन आते ही यह मामला फिर गर्माएगा। इसके अलावा लगभग दर्जन भर ज्वलंत मुद्दे मैनिट में मुंह खोले खड़े हैं, लेकिन डायरेक्टर का इनकी ओर ध्यान नहीं जा रहा है।

आरटीआई एक्टीविस्ट और युवा कांग्रेस नेता लोकेन्द्र गुर्जर ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और मानव संसाधन विकास विभाग से की थी। इसके बाद मैनिट प्रबंधन से जवाब-तलब किया गया। गुर्जर ने आशुतोष शर्मा की मैनिट वापसी को लेकर प्रबंधन को लीगल नोटिस भी भेजा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि डायरेक्टर नरेंद्र सिंह रघुवंशी मामले को दबाने की कोशिश में लगे हुए हैं। डॉ. शर्मा के खिलाफ दिल्ली तक शिकायतों का दौर चल रहा है, लेकिन डायरेक्टर की छत्रछाया में उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा है।

ये है मामला

प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने 2009 में वीआरएस के लिए एप्लाई किया था। 26 अक्टूबर 2009 को मैनिट प्रबंधन ने उन्हें रिटायरमेंट दे दिया था। दरअसल डॉ. आशुतोष शर्मा स्कूल आॅफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर में प्रोफेसर के पद पर ज्वॉइन करना चाहते थे। लेकिन किन्ही कारणों की वजह से उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी। सूत्र बताते हैं कि आशुतोष शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार और 2005 में मैनिट में हुई नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा करने के मामले में सीबीआई की जांच चल रही थी। साथ ही पूर्व डायरेक्टर के एस पाण्डेय के फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज हुआ था। यह जानकारी जैसे ही स्कूल आॅफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर प्रबंधन को लगी उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई। जिसके बाद डॉ. आशुतोष शर्मा हाईकोर्ट चले गए। करीब डेढ़ साल तक केस लड़ने के बाद जब कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली तो उन्होंने मैनिट वापसी के लिए तिकड़म लगाई। आशुतोष शर्मा ने एमएचआरडी के अधिकारियों और तत्कालीन डायरेक्टर अप्पू कुट्टन से सांठगांठ कर मैनिट में वापसी करा ली। 30 दिसंबर 2011 को अप्पू कुट्टन ने एक आदेश जारी करते हुए कहा कि डॉ. आशुतोष शर्मा के रिटायरमेंट लेने से 2011 तक के समय को उनकी बाकि बची छुट्टियों से एडजस्ट कर दिया जाता है और उनकी सीनियरिटी को देखते हुए उन्हें मैनिट का प्रोफेसर नियुक्त किया जाता है। जबकि एमएचआरडी ने नियुक्ति को एनआईटी के नियमों के मुताबिक गलत बताया था। 

मैनिट की यह हैं प्रमुख समस्याएं

-ढाई किमी लंबी पानी की पाइप लाइन बिछाने के लिए जमीन देने का प्रस्ताव। 

-मैनिट कैंपस में डेढ़ किमी लंबी बिजली की लाइन बिछाने के लिए बिजली कंपनी को जमीन देने का प्रस्ताव। 

-इंक्यूबेशन सेंटर में सर्टिफिकेट कोर्सेस शुरू करने की मंजूरी का प्रस्ताव। 

-हॉस्टलों में मूलभूत सुविधाओं अभाव।

-सभी विषयों की फैकल्टी का अभाव।

Source:Agency