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Date 26-02-18

‘मोदीकेयर’ के लिए भी जरूरी होगा आधार, केंद्र सरकार ने बनायी एेसी योजना

By Mantralayanews :05-02-2018 09:19


सरकार ने बजट में घोषित हेल्‍थकेयर स्‍कीम को लागू करने के लिए ‘आधार’ के उपयोग करने की योजना बनायी है ताकि योग्‍य लोग ही इससे लाभान्‍वित हो सके और इसका दुरुपयोग न हो। डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए मांगी गई रकम को अस्‍पताल के खाते में डाला जाएगा। इस स्‍कीम को मार्च तक मंजूरी मिलने की संभावना है जिसके बाद गांधी जयंती के अवसर पर इसे लागू किया जा सकेगा। अप्रैल में इससे जुड़ा डेटा तैयार कर जून में आईटी सिस्टम तैयार कर लिया जाएगा।

बजट में मेगा हेल्‍थ स्‍कीम- मोदीकेयर

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना को ही मोदीकेयर का नाम दिया जा रहा है जो 'आयुष्मान भारत' के तहत लाई गई है। इसके जरिए देश के करीब 10 करोड़ गरीब परिवारों के 50 करोड़ लोगों को हर साल 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवरेज दिया जाएगा।

केंद्र और राज्‍य करेंगे फंडिंग

इस स्कीम के लिए केंद्र और सभी राज्य मिलकर फंडिंग करेंगे। कुल फंडिंग में केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी का अनुपात 60:40 होगा। प्रति परिवार प्रीमियम पर अनुमानित खर्च 1000 से 1200 रुपये होगा। नीति आयोग की गणना के मुताबिक योजना से हर साल केंद्र सरकार पर 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का भार आएगा। 50 करोड़ की आबादी को कवर करने वाली योजना पर होने वाले खर्च के लिए बजट में 1 फीसद के अतिरिक्त सेस की वजह से सरकार के पास 11 हजार करोड़ का अतिरिक्त फंड होगा जिसे इसमें लगाया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, ‘राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना’ के सूत्रीकरण के दौरान आधार के उपयोग पर भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के साथ चर्चा की गयी। आधार एक्‍ट की धारा 7 में यह कहा गया है कि किसी भी स्‍कीम पर भारत के समेकित निधि से खर्च की गयी रकम को आधार से लिंक करना अनिवार्य है। यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडे ने बताया, ‘हां, आधार ऐसे कार्यक्रमों में मदद कर सकता है।‘ भूषण ने कहा, आधार के होने से नकली लाभार्थियों को गलत फायदा उठाने का मौका नहीं मिलेगा और सही लोगों तक यह सेवा आसानी से पहुंच सकेगी।‘ सरकार ने 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए 5 लाख रुपये के मेडिकल कवर की घोषणा की।

आधार से लिंक होने पर डॉक्टर के लिए फर्जी मरीजों की पहचान करना आसान हो जाएगा और वे उन्‍हें भर्ती नहीं करेंगे। यदि कोई व्यक्ति बार-बार इलाज के लिए आएगा तो इसकी पहचान आधार से लिंक्ड सिस्टम के जरिए आसानी से हो जाएगी।

चुने गए परिवार के तमाम सदस्‍यों का होगा बीमा


सरकार ने कहा है कि सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना डेटा से लाभार्थियों को चुनने में मदद ली जाएगी। इस जनगणना में 'वंचित' की श्रेणी में रखे गए करीब 10 करोड़ परिवार को चुना जाएगा। इस स्‍कीम के लांच होने के बाद इन परिवारों के तमाम सदस्यों का बीमा होगा।

मातृत्‍व व शिशु की चिकित्‍सा के लिए वेलनेस सेंटर

सरकार ने देश के पिछड़े इलाकों में 2022 के अंत तक डेढ़ लाख वेलनेस सेंटर खोलने का फैसला किया है। इसके लिए 1200 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इसमें मातृत्व, नवजात, शिशु की चिकित्सा होगी। साथ ही, संक्रामक बीमारियों के लिए सभी 12 किस्म के टीकाकरण का इंतजाम होगा।

अस्‍पताल पहुंचते ही शुरू हो सकेगा इलाज

एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया 50 करोड़ लाभार्थियों वाले इस तरह के बड़े कार्यक्रम को बिना आधार लागू नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने आधार और डीबीटी के जरिए 14-15 करोड़ लोगों में एलपीजी सब्‍सिडी पहुंचाया है। अधिकारी ने आगे बताया, ‘हेल्‍थ इंश्‍योरेंस स्‍कीम’ को लागू करने के लिए आधार का उपयोग कर विश्‍वास स्‍थापित करना महत्‍वपूर्ण है। आधार के उपयोग से व्‍यक्‍ति के अस्‍पताल पहुंचते ही इलाज शुरू हो जाएगा उसे इंतजार नहीं करना होगा। आपातकालीन हालात में समय काफी कीमती होता है और कैशलेस इंश्‍योरेंस से तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा।‘ 
 

Source:Agency