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ये खबर लगानी है   बैतूल :-घोड़ाडोंगरी  :- स्वयं  जहर खाकर , अमृत पीला रही गौमाता

By Mantralayanews :03-04-2018 15:09


घोड़ाडोंगरी :-  आशीष पेंढारकर      बैतूल । वैसे तो हिंदू धर्म में  गौमाता को माँ का  दर्जा प्राप्त है ।  गौमाता के गोबर से घर को लिपा जाता है । गौमूत्र से घर को पवित्र किया जाता है । आज वही गौमाता कचरे पर पड़ी पोलीथीन ,और कचरा ,  खाने को मजबूर है । वही  भूख से तड़पती बिलकती गौमाता  मजबुर होकर   कचरा , जहरीली , पोलीथीन , खा रही  है । क्या  गौमाता  का दर्जा इतना सस्ता हो गया है कि इन गौमाता का ध्यान रखने वाला कोई माँ का लाल नही ? इस कलयुग में मानव इतना स्वार्थी हो गया है कि उसे गाय का दुध. दही. मही.घी.तो खाना याद है मगर गौमाता कि सेवा करना याद नही । यदि यही हाल रहा तो इस मशनरी युग में धीरे धीरे गौमाता के दर्शन होना भी दुर्लभ हो जायेगा वेज्ञानिको ने यह सिद्ध कर दिया है कि माँ के दुध के पश्चात गौमाता का पीला गाढा दुध  गौप्यूश अमृत के समान माना गया है। गाय के दुध में 89 प्रकार के पोषक तत्व पाये जाते है जो मानव जीवन के स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है ।  जिस स्थान पर गौमाता  कचरा खा रही है । उस स्थान की कई दिनों से ग्राम पंचायत द्वारा साफ सफाई नही कराई गई है । ऐसा नही है कि इस स्थान पर  कभी साफ सफाई नही होती । साफ सफाई होती है जब किसी राष्ट्रीय स्तर के नेता का जन्म दिवस हो , या किसी की पुण्यतिथि  तब यहां के जनप्रतिनिधि भी  हाथ में झाड़ू लेकर साफ सफाई करने में अपनी शान समझते है । साथ ही समाचार पत्रों में फ़ोटो लगवाकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस क़रते है । बाद में उस स्थान की और  कभी पलड़ कर नही देखते । घोड़ाडोंगरी नगर के निवासी श्याम बंग का कहना है कि ग्राम पंचायत को उस कचरा वाले स्थान पर डस्ट बिन रखवा देना चाहिये जिससे कि गंदगी भी नही फैल सके  और गौमाता को कचरा पॉलिथीन भी नही खानी पड़े । घोड़ाडोंगरी में वैसे तो सभी राजनैतिक पार्टियां सत्तापक्ष विपक्ष एवं अन्य संगठन मौजूद है । फिर भी आज घोड़ाडोंगरी नगर विकास से विकासशील की राह पर क्यों नही आ रहा है । यदि नगर में विकास होता तो आज हम जिसे गौ माता कहते है ।  वो अपने बछड़े को दूध पिलाती हुई इस तस्वीर में दिख रही है । वो कचरा खाने पर मजबूर नही होती ।                   Source:Agency