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चुनावी अखाड़े में उतरने की तैयारी में कर्नाटक के कई महंत

By Mantralayanews :05-04-2018 08:17


कर्नाटक में साधु-संत कहलाने वाले लोग अब चुनावी अखाड़े में कूदने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में वे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा ले रहे हैं। ऐसे चार महंत हैं जो आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर कांग्रेस सरकार के मंत्रियों के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं । हालांकि भगवा पार्टी ने टिकट देने को लेकर इनसे अभी कोई वादा नहीं किया है। कर्नाटक में ऐसा पहली बार है जब अच्छी-खासी तादाद में धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोग चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं।
चुनाव लड़ने की योजना बना रहे चारों महंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम की तारीफ करते रहे हैं। इनमें उडुपी के लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी, धारवाड़ के बासवनंदा स्वामी, चित्रदुर्ग के मदरा चेन्नइया स्वामी और दक्षिण कन्नड़ के राजशेखरनंदा स्वामी शामिल हैं। श्री गुरु बासवा महामाने के बासवनंदा स्वामी सूरदास हैं। लिंगायत समुदाय के महंत कलाघाटगी सीट से लेबर मिनिस्टर और माइनिंग दिग्गज संतोष लाड के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने 2013 में बीजेपी ज्वाइन की थी और चाहते थे कि 2014 के लोकसभा चुनाव में हासन सीट पर जेडीएस चीफ एच डी देवगौड़ा के खिलाफ लड़ें, लेकिन तब बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। 

लक्ष्मीवरा तीर्थस्वामी शिरूर मठ से जुड़े हैं। शिरूर मठ के प्रति वहां के लोगों में खूब श्रद्धा है और यह उडुपी के आस्था मठ से जुड़ा है। अगर वह चुनाव लड़ते हैं तो ऐसा करने वाले आस्था मठ के पहले महंत होंगे। हालांकि चुनाव लड़ने के उनके फैसले से आस्था मठ के दूसरे महंत खुश नहीं हैं, जिनमें सबसे वरिष्ठ महंत विश्वेश तीर्थस्वामी भी शामिल हैं। लक्ष्मीवरा तीर्थस्वामी कर्नाटक सरकार के मत्स्य पालन मंत्री प्रमोद माधवराज के खिलाफ लड़ना चाहते हैं। हालांकि वह मंत्री के तौर पर माधवराज के किए कार्यों को अच्छा भी मानते हैं। 

भड़काऊ और विवादास्पद भाषण के लिए जाने जाने वाले राजशेखरनंदा स्वामी वज्रदेही मठ के हैं जो मेंगलुरु के पास है। राजशेखरनंदा बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। वह कर्नाटक सरकार के वन मंत्री रमानाथ के खिलाफ लड़ना चाहते हैं, जो छह बार से विधायक हैं। रमानाथ राय की तब खूब आलोचना हुई थी, जब उन्होंने बंटवाल में एक मंदिर द्वारा चलाए जा रहे स्कूल का मिड डे मील बंद करा दिया था। 

चित्रदुर्ग जिले में श्री शिव शरणा मदरा गुरु पीठ के मदरा चेन्नइया स्वामी भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। दलित समुदाय के लोकप्रिय महंत चेन्नइया बीजेपी नेता बी एस येदुरप्पा और के एस ईश्वरप्पा के करीब हैं। हालांकि चेन्नइया ने अन्य तीन महंतों की तरह सार्वजनिक तौर पर चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पिछले दिनों जब कर्नाटक आए थे, चेन्नइया के मठ में भी गए थे। उम्मीद है कि चित्रदुर्ग जिले की सुरक्षित सीट होलालकेरे से वह खड़े होंगे। यह सीट अभी कांग्रेस के पास है, जहां के विधायक एच अंजनेया सामाजिक कल्याण मंत्री हैं। बीजेपी चेन्नइया को 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उतार सकती है। 

कई और महंत जेडीएस के टिकट पर या फिर निर्दलीय ही चुनाव में उतरना चाहते हैं। हाल में जेडीएस में शामिल होने वाले परमानंद रमारुद्ध स्वामी को उम्मीद है कि बिलागी (बागलकोटे जिला) से उन्हें टिकट मिल सकता है। वहीं श्री राम सेने के अध्यक्ष और करुणेश्वर मठ के प्रमुख सिद्धालिंगा स्वामी कलबुर्गी जिले की जेवारगी सीट से लड़ने की अपनी योजना जाहिर कर चुके हैं। 

Source:Agency