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Date 27-05-18

नेपाल रोड ट्रिप चौथी कड़ी : पशुपतिनाथ के दर्शन और भूकंप की पड़ताल

By Mantralayanews :05-04-2018 08:19


काठमांडू में बड़े भाई की तरह तरुण जी मिले थे. बिल्कुल उसी लहजे में समझाया था जैसे कोई बड़ा भाई समझाता है. मैंने भी छोटे भाई की तरह बात सुनी और पांच सौ रुपये लेकर  सीधा कसीनो पहुंचा. कसीनो पहुंचा, तो वहां बाहर हमें आईकार्ड दिखाने के लिए कहा गया. मैंने तो अपना आईकार्ड साथ रखा था लेकिन उदय बगैर कार्ड के तीन चार किमी कसीनों को पता पूछते उत्साह के साथ यहां पहुंच गया था. हमने कर्मचारी को मनाने की कोशिश की लेकिन नहीं माना. अब दो चीजें हो सकती थी या तो हम वापस जाकर कार्ड लाते या मैं अकेला अंदर प्रवेश करता?

उदय बाहर खड़ा रहा और मैं अंदर चला गया. बड़ा-सा दरवाजा खुला. जैसे ही अंदर गया, सिगरेट का धुंधा और शराब की तेज गंध को मार देने की कोशिश करती होटल में जबरन छिड़की गयी फरफ्यूम की गंध आयी. कई लोग टेबल में बैठे खेल रहे थे, तो कुछ लोग  मशीन को इस तरह पीटने में लगे थे जैसे हम अपने घर में पुरानी ब्लैकव्हाइट टीवी को पीटते थे कि तस्वीर कुछ साफ होगी. मैं समझ रहा था यहां, तो तस्वीर नहीं जेब साफ हो रही थी. कसीनो के इस शोर में कहीं जीत की हल्की खुशी थी, तो हार का ढेर सारा गम. 
 
मैं 20 मीनट तक इधर-उधर टहलता रहा. कई टेबल के सामने खड़ा रहा. कुछ समझा औऱ कुछ समझने की कोशिश कर रहा था. तभी मेरे कंधे पर पीछे से किसी ने हल्के से हाथथपाया. मैं ऐसे डर गया जैसे किसी ने मुझे चोरी करते हुए पकड़ लिया हो. डरे सहमे घूमकर देखा तो, सामने लगभग छह फीट का लंबा-चौड़ा आदमी खड़ा है. मैंने कहा, हां जी बोलिये. उसने अंग्रेजी में पूछा आप खेलना चाहते हैं. मैं पहले से हार रहे लोगों के चेहरे और अफसोस की ओहहह सुन रहा था. मैंने कहा, मैं किसी का इंतजार कर रहा हूं. वो आयें, तो हम साथ में खेलना शुरू करेंगे. मैं थोड़ी देर और रूका और चलता बना.

हमारे शहर की तरह नेपाल में चौमिन के ठेले मुझे जगह-जगह नहीं दिखे, हां मोमो के बोर्ड खूब नजर आते थे. रात का खाना मोमो ही था लेकिन अपने यहां के ठेले वाला स्वाद नहीं था.  हमने होटल पहुंचे तरुण जी को पूरी बात बतायी. उन्होंने हंसते हुए कहा अरे खेल लेते यार, हो सकता है कुछ जीत जाते, खैर अच्छा किया  नेपाल तो पर्यटन से ही कमाता है, हमारे यहां कई पर्यटक विदेशों से आते हैं अच्छा नहीं लगता जब उनके पैसे  हारने की बात सुनता हूं, चेहरे पर दुख देखता हूं. मैंने मना किया क्योंकि तुमलोगों को बहुत जगह घूमना है पैसे बचाकर रखो...
 
दूसरे दिन सुबह पशुपतिनाथ में भगवान शिव के दर्शन हुए. शानदार इमारत, एक जगह पर कई छोटे, छोटे मंदिर, सोमवार का दिन था लेकिन ज्यादा भीड़ नहीं. भूकंप में कई पुराने मंदिर टूट गये. सरकार उन्हें ठीक करने की कोशिश कर रही है. कई मंदिरों को संभालने के लिए लोहे के पीलर लगे हैं. पूजा के बाद थोड़ी देर शांत बैठा रहा. यहां से निकलकर नेपाल में कई जगहों पर मैं और उदय घूम आये,   स्तूप, एभिऐशन म्यूजियम, नागरकोट ( पहाड़ से सनसेट औऱ सनराइट के लिए फेमश). कुछ टी शर्ट खरीदे, स्ट्रीट फूड का खूब आनंद लिया लेकिन सड़क के किनारे मांस की दुकान पर मैं यह देखकर हैरान रह गये कि यहां बीफ खूलेआम बिकते हैं. मैं जानता था कि यहां बीफ पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन इस तरह सिर काटकर टेबल के ऊपर रखा देखकर मैं हैरान था. 
 

 
नेपाल आते वक्त पूरे रास्ते मैं समझने में लगा था कि भूकंप ने इन इलाकों में कितना नुकसान पहुंचाया होगा? पहाड़ों में जो लोग रहते हैं, उनकी जिंदगी हर वक्त  खतरे में होती होगी?  नेपाल रोड ट्रीप के फैसले में अंदर के घुमक्कड़ पर्यटक ने कम पत्रकार ने ज्यादा उत्साहित किया था. काठमांडू में भी हम ऐसे लोगों की तलाश में लगे रहे, जो हमें भूकंप की जानकारी दे सकें. सरकार ने कितना काम किया है? आम लोगों तक राहत पहुंच रही है या नहीं? अबतक कितने लोग  बेघर हैं ?  इन सवालों का जवाब ढूंढते-ढूढते हमारी नजर पड़ी नेपाल प्रेस काऊंसिल के बोर्ड पर पड़ी, बाइक की हैंडिल अचानक  गाड़ी की उस इमारत की तरफ घूम गयी. 

यहां कई पत्रकारों से बात की, लोगों को मिलने वाली राहत पर सवाल पूछे, पता चला राजनीति का रूप हर जगह वही है. भ्रष्ट ! इसे हरे, भगवे और लाल रंग किसी से रंग लीजिए. एक पत्रकार ने बताया, काफी वक्त बीत गया. नेपाल में कई चुनावों में भूकंप बड़ा मुद्दा रहा, चुनाव इसी मुद्दे पर हारे - जीते जा रहे हैं लेकिन लोगों तक अब भी मदद नहीं पहुंची है.

Source:Agency