Breaking News

Today Click 378

Total Click 3599054

Date 26-02-18

बस्तर मे दो साल मे मिले 56 हजार कुपोषित बच्चे,नियंत्रण पर 30 करोड़ खर्च

By Mantralayanews :07-02-2018 07:59


रायपुर। बस्तर संभाग में दो साल में 56 हजार से अधिक कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू ने विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी है। इन दो वर्षों (वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 ) में कुपोषण नियंत्रण पर करीब 30 करोड़ स्र्पए से अधिक खर्च किए गए हैं।

कांग्रेस विधायक दीपक बैज के सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया है कि बस्तर जिले कुपोषण पर नियंत्रण के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की सेवाओं व संबंधित विभागीय योजनाओं के माध्यम से विविध प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें पूरक पोषण आहार, टीकाकरण, संदर्भ सेवा, स्वास्थ्य जांच, स्वास्य एवं पोषण शिक्षा के साथ मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री अमृत योजना, वजन त्योहार के अलावा सुपोषित बस्तर अभियान चलाया जा रहा है।

बस्तर जिले के नौ विकासखंडों में कुपोषण के सबसे ज्यादा मामले बस्तर में ही मिल रहे हैं। पिछले साल वहां 7123 बच्चों की पहचान की गई थी। चालू वित्तीय वर्ष में 5425 की पहचान की गई है। कुपोषण की सबसे कम संख्या बस्तानार में है। वहां पिछले वित्तीय वर्ष में 1988 और इस बार 968 बच्चे मिले हैं। मंत्री ने बताया कि पिछले साल जिले में 18 करोड़ 41 लाख 97 हजार 633 और चालू वित्तीय वर्ष में 12 करोड़ 45 लाख 71 हजार 455 स्र्पए खर्च किए गए हैं।

राज्य में 30 तरह के खनिज, लेकिन खनन केवल 16 का हो रहा

छत्तीसगढ़ के गर्भ में 30 तरह के खनिजों का भंडार है, लेकिन इनमें से केवल 16 का ही खनन हो पा रहा है। विधानसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यह जानकारी दी है। जिन खनिजों का खनन हो रहा है उनमें कोयला, लोह अयस्क, चूनापत्थर, बॉक्साइट, टिन, क्वार्टजाइट, र्क्वाट्ज, फायर क्ले, ग्रेनाइट, वाइट क्ले, फर्शीपत्थर, सेंडस्टोन, साधारण रेत, मुरूम और साधारण मिट्टी। अमित जोगी के इस सवाल के जवाब में सीएम ने बताया कि इन 16 के अलावा सिलिका सेंड, कोरण्डम, सोपस्टोन, फ्लोराइट, हीरा, गारनेट, मार्बल, ग्रेफाइट, पोर्सेलेनाइट, लेटेराइट, मोल्डिंग सेंड व ऑकर होने के भी प्रमाण मिले हैं।

रायगढ़ के उद्योगों में हुए हादसों में दो साल में 15 लोगों की मौत हुई है। इनमें से तीन मौतें जिंदल की कंपनियों में तथा सिंघल और अंजली में दो-दो मौतें शामिल हैं। श्रम मंत्री भईयालाल रजवाड़े ने उमेश पटले के एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी है। मंत्री ने बताया है कि यह मौते वर्ष 2016-17 और 2017-18 के दौरान हुए हादसों में हुई हैं। इन तीन प्लांटों के अलावा जिन उद्योगों में हादसा हुआ है उनमें श्री श्याम इस्पात, बसंती राइस मिल, हनुमान राईस मिल, बिमल रिफैक्ट्रीज, एमएसपी स्टील, आलोक इस्पात और एनआर इस्पात शामिल है।
 

Source:Agency