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ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को मुफ्त लगेगा 20 हजार रुपए का इंजेक्शन

By Mantralayanews :06-04-2018 09:03


भोपाल । ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के इलाज के लिए प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है। भोपाल के जेपी अस्पताल समेत प्रदेश के 19 जिला अस्पतालों में ब्रेन स्ट्रोक के इलाज के लिए यूनिट बनाए जाएंगे। इन सभी अस्पतालों में सीटी स्कैन की सुविधा भी शुरू की जा रही है। स्वास्थ्य संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि स्ट्रोक के मरीजों को चार घंटे के भीतर इलाज मिल जाए तो वे लकवा से बच जाते हैं। लकवा का असर होता भी है तो बहुत कम।

लेकिन, इसके लिए यह पता करना जरूरी होता है कि स्ट्रोक है या नहीं। दिमाग के कितने हिस्से में खून का थक्का जमा है। यह सब देखने के बाद खून का थक्का घोलने के लिए फौरन एक इंजेक्शन दिया जाता है। जितना जल्दी यह इंजेक्शन दिया जाए उतने बेहतर नतीजे आते हैं। चार घंटे बाद इंजेक्शन लगाने का कोई मलतब नहीं होता। इस इंजेक्शन की कीमत करीब 20 हजार रुपए है, लेकिन स्ट्रोक यूनिट में सभी मरीजों को नि:शुल्क इंजेक्शन लगाया जाएगा।

इंजेक्शन सीटी स्कैन जांच के बाद दिया जा सकता है। लिहाजा अभी यह सुविधा उन्हीं अस्पतालों में शुरू हो रही है जहां पीपीपी से सीटी स्कैन मशीनें लगाई जा रही हैं। भोपाल व मुरैना में सीटी स्कैन मशीनें शुरू भी हो गई हैं।

इन अस्पतालों में बनेंगी यूनिट

भोपाल, मुरैना, शिवपुरी, गुना, रतलाम, शाजापुर, धार, देवास, खंडवा, सागर, छतरपुर, कटनी, शहडोल, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा आदि।

एक्सपर्ट व्यू

दिमाग में खून की नसों में खून का थक्का जमने या फिर अन्य वजह से अवरोध हो जाता है। इसका असर दिमाग के साथ ही शरीर के दूसरे हिस्सों में भी होता है। दिमाग से संपर्क कटने की वजह से संबंधित अंग काम करना बंद कर देता है। चार घंटे के भीतर थक्का घोलने का इंजेक्शन दिया जाए तो यह धीरे-धीरे घुल जाता है। कुछ दिन फिजियोथैरेपी के बाद मरीज सामान्य हो जाता है। हर जिला अस्पताल में यह इंजेक्शन मिले तो ज्यादातर मरीजों को लकवा से बचाया जा सकता है। -डॉ. आरएस यादव, न्यूरोलॉजिस्ट, हमीदिया

19 जिला अस्पतालों में स्ट्रोक यूनिट बनाए जाने हैं। यहां के डॉक्टरों की एम्स में ट्रेनिंग कराई जाएगी। इसके बाद यूनिट शुरू किए जाएंगे। इससे मरीजों को लकवा से बचाया जा सकेगा। -डॉ. केके ठस्सू, स्वास्थ्य संचालक
 

Source:Agency