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घटते व्यापार से जनता चिंतित, स्वास्थ्य सुविधाएं भी बीमार

By Mantralayanews :08-04-2018 07:01


मनेन्द्रगढ़ । इस विधानसभा सीट के दो अहम हिस्से हैं, मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी। दोनों क्षेत्रों के बीच प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी अहम होता है। हालांकि पिछले दो चुनावों में चिरमिरी क्षेत्र को ही प्रतिनिधित्व मिला है। चिरमिरी कालरीक्षेत्र है, लगातार खदानें बंद होने के कारण विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है। मनेंद्रगढ़ में व्यवसाय बढाने के लिए कोई पहल नहीं हो पाना भी मुद्दा बना हुआ है। 1993 से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। 2008 के परिसीमन के बाद के दोनों चुनाव में यह भाजपा के खाते में गई।

2018 में बनेंगे चुनावी मुद्दे यहां चिरमिरी का विस्थापन, चिरमिरी को तहसील का दर्जा, मनेंद्रगढ़ में घटता व्यापार व पर्यटन, सड़क की समस्या और रोजगार की कमी प्रमुख चुनावी मुद्दे हो सकते हैं। कृषि बीमा, स्वास्थ्य सुविध्ााओं की कमी भी चुनावी मुद्दा बन सकते हैं। बढ़ा मतदान, लेकिन अंतर हुआ कम राज्य बनने के बाद 2003 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के गुलाब सिंह ने यहां से जीत दर्ज की।

इसके बाद के दोनों चुनाव में भाजपा के क्रमश: दीपक कुमार पटेल और श्याम बिहारी जायसवाल ने परचम लहराया, लेकिन जीत का अंतर घटता जा रहा है। पटेल ने 2008 के चुनाव में 42 फीसद वोट हासिल किया था। जीत का अंतर करीब 14 हजार था। पिछले चुनाव में जायसवाल केवल चार हजार वोट से जीत पाए, उन्हें 37 फीसद वोट हासिल हुआ, जबकि 2003 में करीब 60 फीसद मतदान हुआ था, वहीं 2013 में 72 फीसद मतदान हुआ था।
 

Source:Agency