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मालदीव में चीन की बढ़ती गतिविधियां भारत-अमरीका के लिए चिंताजनक

By Mantralayanews :10-04-2018 07:34


चीन केवल मालदीव ही नहीं, श्रीलंका तथा पाकिस्तान में भी तेजी से पैर पसार रहा है। उसके बढ़ते दखल ने अमरीका की नींद उड़ा दी है। मालदीव में चीन की दखलअंदाजी भारत के लिए भी चिंता का विषय है। कुछ वक्त पहले मालदीव के एक पूर्व मंत्री ने चीन पर मालदीव में जमीन हथियाने का आरोप लगाया था और कहा था कि अगर इस स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तो भारत और अमरीका दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इन आरोपों के बीच पेंटागन ने शनिवार को कहा कि यह अमरीका के लिए चिंता का कारण है। 

पेंटागन के शीर्ष अधिकारी जोई फेल्टर ने कहा कि अमरीका एक स्वतंत्र और खुले इंडिया-पैसिफिक नियमों के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन जहां तक चीनी प्रभाव की बात है, मालदीव में चिंतित करने वाली गतिविधियां देखी गई हैं। अधिकारी ने आगे कहा, ‘‘यह स्थिति भारत के लिए चिंताजनक है और हमारे लिए भी यह चिंता का विषय है। अब बस यह देखना है कि इससे कैसे निपटा जाए। यह हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है।’’ मालदीव में चीन का हस्तक्षेप अमरीका के साथ-साथ भारत के लिए चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि चीन और भारत के बीच समय-समय पर विवाद रहे हैं। मालदीव के साथ भी भारत के संबंधों में उस वक्त तनाव आ गया था जब वहां के राष्ट्रपति ने फरवरी में मालदीव में आपातकाल घोषित कर दिया था। ऐसे में चीन की मालदीव से निकटता भारत के पसीने छुड़ाने वाली है। 

बता दें कि हाल ही में अमरीका के दौरे के दौरान मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अहमद नसीम ने आरोप लगाया था कि चीन मालदीव के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और वहां जमीन हथियाने की कोशिश कर रहा है। अहमद नसीम ने यह भी कहा था कि अगर इस पर नजर नहीं रखी गई और कुछ नहीं किया गया तो अमरीका और भारत दोनों के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन मालदीव में एक बेस बनाने को उतावला है, जहां एक दिन युद्धपोत तथा पनडुब्बियां रखी जा सकती हैं।

पेंटागन ने आगे कहा कि मालदीव में चीन की ये गतिविधियां उन सभी राज्यों के लिए चिंता का विषय हैं जो रूल बेस्ड ऑर्डर चाहते हैं। पेंटागन के अनुसार, ‘‘हम मानते हैं कि हर छोटे-बड़े राज्य के अधिकार तभी सुरक्षित किए जा सकते हैं जब हम एक स्वतंत्र और खुले इंडिया-पैसिफिक नियम अपनाएं और नियम आधारित आदेश बनाएं। चीन की कुछ गतिविधियां, जो हमने देखी हैं, वे चिंतित करती हैं क्योंकि वे उन हितों के अनुरूप नहीं हैं। मुझे संदेह है कि भारत इन चिंताओं को सांझा करता है भी या नहीं।’’
 

Source:Agency