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देवव्रत के खिलाफ खैरागढ़ से पद्मादेवी लड़ेंगी चुनाव?

By Mantralayanews :12-02-2018 06:19


राजनांदगांव। पूर्व सांसद देवव्रत सिंह को अपनी पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) में शामिल कराकर कांग्रेस को भले ही पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने जोरदार झटका दिया, लेकिन अब कांग्रेस देवव्रत पर पलटवार करने की तैयारी में है।

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चर्चा है कि देवव्रत की पहली पत्नी पद्मादेवी सिंह को कांग्रेस अपने पाले में लाने के लिए सियासी दांव लगाने की जुगत में है। यदि ऐसा होता है कि देवव्रत व जकांछ के लिए मुश्किलें हो सकती हैं। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

करीब दो साल पहले देवव्रत और पद्मादेवी सिंह के मध्य आपसी राजीनामे के बाद तलाक हुआ था। उसके बाद से दोनों अलग रह रहे हैं। देवव्रत खैरागढ़ में हैं, जबकि पद्मादेवी दिल्ली में बस गईं हैं। हालांकि पूर्व सांसद से तलाक के बाद मिले बंटवारे की संपत्ति की देखरेख के लिए पद्मादेवी का खैरागढ़ में अब भी आना-जाना है।

लड़ चुकीं हैं विधानसभा चुनाव

देवव्रत के सांसद बनने के बाद से खैरागढ़ की राजनीति में पांव जमाने के लिए पद्मादेवी 2007 के उपचुनाव में कांग्रेस की टिकट पर किस्मत आजमा चुकी हैं। हालांकि उपचुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी रहे कोमल जंघेल से हार का सामना करना पड़ा था। उसके बाद वे राजनीति में कभी सक्रिय नहीं रहीं।

तगड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि

राजघराने से जुड़े लोगों का दावा है कि पद्मादेवी विशुद्घ रूप से घरेलू महिला जरूर हैं, लेकिन उनके मायके पक्ष का मध्यप्रदेश में सशक्त राजनीतिक पृष्ठभूमि रहा है। लिहाजा वह आगामी विधानसभा चुनाव में अपने करीबियों से चुनाव लड़ने की चर्चा कर रहीं हैं। इस बात की भनक कांग्रेस को भी लग गई है।

खबर है कि पद्मादेवी को कांग्रेस से चुनाव लड़ने के लिए ग्वालियर राजघराने की मदद ली जा रही है। मध्यप्रदेश के युवा चेहरे पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिए कांग्रेस पद्मादेवी को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रयासरत है। पद्मादेवी के चुनाव लड़ने की खबरें इन दिनों खैरागढ़ के राजक्षेत्र में गलियों में भी गूंज रही है।

जकांछ व भाजपा दोनों की मुश्किलें

कांग्रेस से पद्मादेवी के जुड़ने से देवव्रत की मुश्किलें तो बढ़ेंगी ही, भाजपा की परेशानी भी बढ़ सकती है। पद्मादेवी को चुनाव लड़ाकर कांग्रेस देवव्रत को खैरागढ़ तक सीमित करने की रणनीति बना सकती है। उस कारण भी कांग्रेस पद्मादेवी को साथ लेने के लिए ज्यादा रुचि ले रही है। हालांकि अभी देवव्रत की जकांछ से खुद की उम्मीदवारी तय नहीं हुई है। इस कारण इस तरह की चर्चाओं को भी बल नहीं मिल पा रहा है।
 

Source:Agency