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पहाडो के बीच से निकली केन नदी क्या 2 रंग दिखाती हैं

By Mantralayanews :11-04-2018 06:18


पहाडो के बीच से निकली केन नदी क्या 2 रंग दिखाती हैं बांदा: आखिर क्यों खत्म नहीं होगी केन नदी। लाख जीवनदायिनी हो लेकिन जिस तरह से उसका सीना छलनी होता आया है और आगे भी तैयारी हो रही है। उससे तो यही कहा जा सकता है कि सावधान, खत्म होने वाली है केन नदी। जिले में जितने किलोमीटर केन नदी फैली है उतने के हर किलोमीटर में उसे छलनी करने की तैयारी भी हो रही है। खनिज विभाग द्वारा अभी तक आवंटित 24 खदानों में 80 फीसद केन नदी की हैं। वहीं 43 अन्य चिंहित स्थानों में ज्यादातर इसी नदी में स्थित हैं। पहाड़ों के बीच से निकली केन नदी अपने साथ बहुतायत में लाल सोना (मौरंग) ढोकर लाती है। पहाड़ों से निकलने के चलते इसकी मौरंग भी अव्वल दर्जे की होती है। जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक पसंद की जाती है। इसीलिए इसकी मांग भी सबसे अधिक रहती है। इस बार भी ज्यादातर खदानें इसी नदी की आवंटित की जा रही हैं। अभी तक आवंटित 24 खदानों में जहां ज्यादातर इसी नदी की हैं। वहीं आगे चिंहित किए गए 43 स्थान में भी ज्यादातर इसी के हैं। जिनके आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। जिससे यह कहा जा सकता है कि जनपद में करीब 84 किलोमीटर का सफर तय करने वाली केन नदी को औसतन हर किलोमीटर पर छेदने की तैयारी चल रही है। श्राप बन रही खासियत अव्वल किस्म की मौरंग ही केन के लिए श्राप बन गया है। इससे निकली मौरंग पूरे प्रदेश में सबसे अधिक पसंद की जाती है। दूसरी नदियों की अपेक्षा इसकी मौरंग ऊंचे दामों में जहां बिकती है वहीं इसके खरीददार भी सबसे अधिक मंडियों में मौजूद. Source:Agency