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Date 22-02-18

बंद होगी इंसान व जंगली हाथी की लड़ाई, मास्टर प्लान तैयार

By Mantralayanews :13-02-2018 09:20


अंबिकापुर। सरगुजा वनवृत्त में मानव-हाथी द्वंद को नियंत्रित करने के लिए आगामी 5 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रख मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। वन मंडल के आधार पर सीसीएफ केके बिसेन द्वारा अनुभव और विषय विशेषज्ञों, प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों व वन अधिकारियो-कर्मचारियों से मिले फीडबैक के आधार पर सबसे पहले सरगुजा वनमंडल का पहला मास्टर प्लान तैयार किया गया है। वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक मानव-हाथी द्वंद रोकथाम में इस मास्टर प्लान को बहुपयोगी माना जा रहा है।

सरगुजा वनमंडल के लिए हाथी-मानव द्वंद को नियंत्रित करने तैयार मास्टर प्लान में वन अधिकारियों के अनुभव, क्षेत्रीय अमले से समग्र चर्चा, मीडिया व जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मसले पर आए विचारों को भी समाहित किया गया है।

इस मास्टर प्लान के विषयवस्तु में आपरेश जय गजराज, गजराज मीडिया, चैलेंजिंग टास्क, वाट्सएप गु्रप के विचारशील बिंदुओं, व्यवहारिक व तकनीकी दृष्टिकोण पर भी चिंतन किया गया है। वनमंडलाधिकारी से लेकर बीट गार्ड तक के कौशल क्षमता, उनको आने वाले व्यवहारिक कठिनाइयों, घटनाओं के उपरांत उपजने वाले आक्रोश, जनप्रतिनिधियों से वन विभाग की इस मानव-हाथी द्वंद की समस्या के निराकरण की अपेक्षाओं का विश्लेषण भी किया गया है।

कर्नाटक राज्य में ग्रामीणों का हाथियों के प्रति प्रेम को समझकर छत्तीसगढ़ राज्य में भी ग्रामीणों का हाथियों के प्रतिम नफरत को प्रेम में बदलकर इस प्रकार की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, जिससे जंगली हाथी संरक्षित वन क्षेत्रों तक ही सीमित रहें और रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचकर जनहानि न करने पाएं।

सीसीएफ केके बिसेन का मानना है कि इस मास्टर प्लान के तैयार हो जाने के बाद संबंधित वनमंडल द्वारा उस अनुरूप सारी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर मानव-हाथी द्वंद को नियंत्रित करने में तथा जनहानि को शून्य करने में सफलता प्राप्त होगी।

सीसीएफ का कहना है कि कई बार परिस्थितियां ऐसा अनुभव देती हैं, जिसे लिपिबद्घ करने से भविष्य में भी वैसी ही परिस्थिति निर्मित होने पर उस अनुरूप सारी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा सकता है।

इसी आधार पर सरगुजा वनमंडल के लिए पहला मास्टर प्लान तैयार किया गया है। वरिष्ठ वन अधिकारियों के अलावा हाथी विशेषज्ञों, भारतीय वन्य जीव संस्थान के बायोलाजिस्ट आदि की भी मदद इसके लिए ली गई है।
 

Source:Agency