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एयर इंडिया के लिए बोली लगा सकती हैं ये तीन विदेशी एयरलाइन्स: रिपोर्ट

By Mantralayanews :12-04-2018 07:24


जेट एयरवेज और इंडिगो एयरलाइन्स, एयर इंडिया के निजीकरण के लिए बोली लगाने से किनारा कर चुकी हैं। हालांकि, महाराजा का दर्जा प्राप्त एयर इंडिया के लिए अभी सारे दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रमुख विदेशी एयरलाइंस ने एयर इंडिया को खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन प्रमुख विदेशी एयरलाइन्स एयर इंडिया में हिस्सेदारी खरीद सकती हैं। इसमें ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्थांसा और सिंगापुर एयरलाइन्स शामिल हैं। ये तीनों की विनिवेश प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। 28 मार्च 2018 को सरकार ने फैसला किया था कि वो अपने पास सिर्फ 24 फीसद हिस्सेदारी रखेगी और एयर इंडिया की 76 फीसद हिस्सेदारी बेच देगी। सरकार ने इसके लिए रणनीतिक विनिवेश की तैयारी भी कर ली है। सरकार को यह फैसला एयर इंडिया के बढ़ते कर्ज को देखकर लेना पड़ा है, हालांकि सरकारी विमानन कंपनी धीरे-धीरे अपने कर्ज से उबर रही है।

एयर इंडिया की वर्तमान स्थिति: दिसंबर 2017 तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एयर इंडिया के पास 115 एयरक्राफ्ट हैं और वो 39 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को संचालित करती है। वहीं 1 दिसंबर 2017 तक एयर इंडिया में 11,214 करोड़ स्थायी कर्मचारी हैं और 2,913 कर्मचारी ऐसे हैं जो कि निविदा पर कार्यरत हैं। घरेलू बाजार में एयर इंडिया की 12.27 फीसद की हिस्सेदारी है जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 16.93 फीसद की हिस्सेदारी रखती है।

एयर इंडिया को खरीदना खरीदार के लिए कितना बेहतर:

सरकारी विमानन कंपनी में आकर्षित करने लायक क्या है अगर इसकी बात की जाए तो वह यकीनन एयर इंडिया का फ्लीट साइज होगा। 115 एयरक्राफ्ट के साथ एयर इंडिया का बेड़ा इंडिगो के बाद दूसरे नंबर पर है। एयर इंडिया निवेशकों को मौका दे रही है कि वो इसे दुनिया के सबसे बड़े बाजार के रुप में विस्तार दे पाए।
भारत आने और जाने वाले यात्रियों की पहली पसंद एयर इंडिया होती है, यानी यह अधिकांश यात्रियों को लेकर उड़ान भरती है। अगर कोई निवेशक इस विमानन कंपनी को खरीदता है तो उसे बना बनाया बाजार मिलेगा, साथ ही उसे घरेलू स्तर पर उड़ान के लिए जरूरतों की पूर्ति भी आसानी से पूरी हो जाएगी, इस प्रक्रिया में आमतौर पर वर्षों लगते हैं।
देश के मुख्य हवाई अड्डों में स्लॉट। भारतीय विमानन में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक मुंबई और नई दिल्ली में अपने मुख्य हवाई अड्डों पर क्षमता की कमी है।
मुंबई हवाई अड्डा पहले से ही खचाखच भरा हुआ है और जब तक सुविधा का विस्तार नहीं किया जाता है, तब तक कोई भी एयरलाइन कोई भी उड़ानें नहीं जोड़ सकती है। एयर इंडिया के पास मुंबई में पहले से ही स्लॉट है। इसकी मदद से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स तुरंत उड़ाने भर सकती हैं।

Source:Agency