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प्री नर्सरी से 12वीं तक सरकार के हवाले पढ़ाने की सारी जिम्मेदारी

By Mantralayanews :13-04-2018 07:41


रायपुर। स्कूली शिक्षा में अब राज्य सरकार पर बच्चों के पठन-पाठन की जिम्मेदारी पहली से 10वीं तक के बजाय प्री नर्सरी से 12वीं तक होगी। अभी आरटीई (शिक्षा के अधिकार अधिनियम) के तहत राज्य सरकार को पहली से लेकर आठवीं तक बच्चों को अनिवार्य शिक्षा देनी पड़ती है। लेकिन अब प्री नर्सरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई भी सरकार अनिवार्य तौर पर बच्चों तक पहुंचाने के लिए प्लान बना रही है।

इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य के स्कूल शिक्षा सचिव, प्रशिक्षण संस्थानों के संचालकों को पत्र लिखकर रण्ानीति तय करने के लिए कहा है। केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा योजना के लिए एक अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2020 के लिए नई एकीकृत शिक्षा योजना लागू कर दी है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में भी बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

यह होगा फायदा

योजना का मुख्य उद्देश्य नर्सरी से लेकर माध्यमिक स्तर तक सबके लिए समान रूप से समग्र और गुणवत्तायुक्त शिक्षा तय करना है। शिक्षाविदों का कहना है कि पिछड़े जिलों को खासकर बस्तर, कोण्डागांव, नारायणपुर, सुकमा जैसे धुर नक्सलग्रस्त इलाकों में इस अभियान का फायदा मिलेगा। बच्चों के कौशल प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। खेलो इंडिया के तहत स्कूलों में खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

इन पर अधिक होगा फोकस

बच्चों का लर्निंग आउटकम बढ़ाने के लिए शिक्षकों की क्षमता विकास के कार्यक्रम होंगे। एसीईआरटी और डाइट्स को मजबूत किया जाएगा। डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट क्लास रूम बनेंगे। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की मजबूती के लिए कक्षा 6वीं - 8वीं से लेकर 12वीं कक्षा तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उन्न्यन होगा।

कई शिक्षण संस्थान होंगे मर्ज

स्कूल-साक्षरता और शिक्षक शिक्षण विभाग की योजनाओं को आपस में मर्ज कर समग्र शिक्षा अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है। खासकर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एससीईआरटी) को सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) और शिक्षक शिक्षण अभियान को एक करके कार्यक्रम बनाना है।

मामले में सर्व शिक्षा अभियान के संचालक मयंक बरवड़े का कहना है कि केंद्र सरकार के आदेश के बाद सारे प्रशिक्षण कार्यक्रम अब एससीईआरटी के मार्फत ही होंगे। इस तरह की योजना बनाई जा रही है। गौरतलब है कि राज्य स्कूल शिक्षा सचिव से इस ड्राफ्ट पर 10 अप्रैल तक टिप्पणी और सुझाव भी मांगे गए थे। ड्रॉफ्ट बनकर तैयार हो चुका है।
 

Source:Agency