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लगाम से भी नहीं थमी बिटकॉइन निवेशकों की उड़ान

By Mantralayanews :16-04-2018 07:24


कुछ दिनों पहले बोर्ड का इम्तिहान देने वाले अंकित पटेल संभावित नतीजों से अधिक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वेबसाइट पर माथापच्ची कर रहे हैं। किशोरवय पटेल अपने जेब खर्च में कटौती कर बिटकॉइन में निवेश कर रहे हैं। बिटकॉइन  फिलहाल दुनिया की सबसे लोकप्रिय आभासी मुद्रा है। अब उनका निवेश बढ़कर लगभग दोगुना हो गया है, लेकिन पटेल का कहना है कि वह लंबे समय के लिए दांव खेलने आए हैं।   केंद्रीय बैंक ने इस महीने के शुरू में जब से आभासी मुद्रा एक्सचेंजों पर सख्ती करनी शुरू की है तब से पटेल नए दिशानिर्देशों के बारे में जानने के लिए आरबीआई की वेबसाइट खंगालते रहते हैं। पटेल इस उम्मीद में हैं कि अगर दिशानिर्देश वापस नहीं लिए गए तो कम से कम इनमें ढील जरूर दी जाएगी।

पटेल कहते हैं, 'वह लेनदेन के लिए किसी स्थानीय एक्सचेंज का इस्तेमाल नहीं करते हैं, इसलिए आरबीआई की सख्ती से उन पर कोई असर नहीं हुआ है, लेकिन अपने पिता के नाम से एक स्थानीय एक्सचेंज पर मैंने कुछ निवेश कर रखा है। मैं तीन महीने के भीतर इसे एक निजी वॉलेट में अंतरित कराऊंगा।' पटेल का कहना है कि निवेश निकालने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय से इन्हें बनाए रखा है और वैसे भी बाजार इस समय नुकसान में है। आरबीआई ने 5 अप्रैल को दिशानिर्देश जारी कर बैंकों और वित्तीय संस्थानों को आभासी मुद्राओं में लेनदेन से मना कर दिया था। बैंकिंग नियामक ने इन इकाइयों को कारोबार समेटने के लिए तीन महीने का समय दिया था।

भारत में आभासी मुद्रा एक्सचेंज फिलहाल अपनी अगली रणनीति पर चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन इन एक्सचेंजों के कारोबारी निवेश निकालने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। इसकी वजह यह है कि पिछले दो महीने में बिटकॉइन बाजार को खासा झटका लगा है, इसलिए कम से कम बाजार सुधरने तक वे इंतजार करना चाहते हैं। दूसरा पहलू यह है कि आरबीआई का आदेश उन कई कारोबारियों के लिए फायदेमंद साबित हुआ, जो बिटकॉइन और अन्य दूसरी आभासी मुद्राओं में गिरावट का इस्तेमाल और अधिक खरीदारी के लिए करते थे और स्थानीय निवेश एक्सचेंजों के बजाय अपने निजी वॉलेट में इन्हें रखते थे। ऐसा नहीं है कि आरबीआई ने पहली बार आभासी मुद्राओं के जोखिमों के खिलाफ अभियान छेड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 5 अप्रैल का दिशानिर्देश भारतीय कंपनियों के लिए रही-सही कसर भी पूरी कर दी है।

आभासी मुद्रा एवं ब्लॉकचेन आधारित अंतरराष्ट्रीय रेमिटेंस से जुड़ी कंपनी हैशकैश कंसल्टेंट्स के प्रबंध निदेशक राज चौधरी कहते हैं, 'ऐसे केंद्रों की संख्या में इजाफा होगा, हां लोग अपने बिटकॉइन का विनिमय कर सकते हैं। कंपनियां अभासी मुद्राओं के कारोबार के लिए माकूल देशों जैसे सिंगापुर आदिकी ओर रुख करेंगी।' इस बीच, घबराहट में कुछ कारोबारियों ने बिटकॉइन में अपने निवेश भारतीय एक्सचेंजों से निजी वॉलेटों में स्थानांतरित कर दिए हैं।  बिजनेस स्टैंडर्ड ने कम से कम पांच ऐसे और निवेशकों से बात की जिन्होंने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर ऐसी ही मंशा जताई। आरबीआई के कदम से बाजार में कारोबार की चाल जरूत सुस्त हो गई है, लेकिन निवेशकों के इरादे कमजोर नहीं हुए हैं। 

Source:Agency