Breaking News

Today Click 406

Total Click 3793039

Date 18-08-18

रायपुर : गर्मी निकल गई तब निगम ने खरीदे सात पानी के टैंकर

By Mantralayanews :09-06-2018 08:51


रायपुर। भीषण गर्मी बीत चुकी है, मानसून ने दस्तक दे दी है तब जाकर नगर निगम ने 20 ट्रेक्टर, सात पानी के टैंकरों की खरीदी की है। यह खरीदी जल कष्ट निवारण मद 2018-19 के तहत की गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इनकी उपयोगिता क्या? अगर खरीदी तय समय पर हो जाती तो किराए पर टैंकर लगवाने की जरूरत नहीं पड़ती और निगम के लाखों रुपये बच जाते। यह प्रशासनिक चूक का नतीजा है। विपक्ष से लेकर सत्तापक्ष तक इस खरीदी पर यही कह रहा है।

'नईदुनिया' को खरीदी की जानकारी मिली। टीम टिकरापारा स्थित मोटर वर्कशॉप पहुंची। यहां खुले आसमान के नीचे नए टैंकर और ट्रैक्टर पार्क थे। यहां काम करने वाले कर्मचारियों से पूछने पर बोले- अभी पार्ट्स की असेंबलिंग बाकी है, तब फोटो लेना। अभी इसी प्रक्रिया में हफ्ताभर लगेगा। बिना आरटीओ रजिस्ट्रेशन के ये सड़क पर दौड़ नहीं सकते। इसमें कम से कम महीने-डेढ़ महीने तो लगेगा ही। सूत्रों के मुताबिक निगम ने टेंडर प्रक्रिया में ही देरी की।

अगर समय पर होती खरीदी तो-

- निगम ने इस साल किमी नहीं ट्रिप के हिसाब से टेंडर निकाला था। दो ठेकेदारों की दरें 374 रुपये आईं, इन्हें वर्कऑर्डर जारी किया। हालांकि अभी निगम ने भुगतान नहीं किया है, माना जा रहा है यह राशि 40-45 लाख रुपये होगी।

- जोनों में ऐसे भी टैंकर दौड़े जो लीकेज थे, जिनकी टोंटियां नहीं थीं और पानी की बर्बादी होती रही।

आखिर क्यों नहीं आया एमआइसी में मुद्दा-

सूत्रों के मुताबिक एक ट्रैक्टर की कीमत 4.73 लाख रुपए है, जबकि टैंकर 1.20 लाख के करीब। जब इनकी संख्या 20 और छह है तो सवाल यह भी है कि आखिर यह मुद्दा मेयर इन कौंसिल (एमआइसी) में क्यों नहीं आया? 50 लाख रुपये से ऊपर के मामले एमआइसी में आते हैं, यह राशि जोड़ने पर इससे अधिक है।

क्या कहते हैं निगम के जिम्मेदार-

ठेके के टैंकर नहीं दौड़ाने पड़ते

निगम अभी टैंकर, ट्रैक्टर की खरीदी कर रहा है, जबकि गर्मी तो निकल चुकी है। अगर इन्हें समय पर खरीदा जाता तो संभव था कि किराए टैंकर न दौड़ाने पड़ते। निगम में प्लानिंग का अभाव है। अफसर मनमानी कर रहे हैं।- प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सभापति

प्रशासनिक चूक है

एक प्रशासनिक चूक है, टेंडर प्रक्रिया समय पर हो जानी चाहिए थी। हालांकि मैं यह भी स्पष्ट कर दूं कि हम टैंकर के लिए टेंडर प्रक्रिया कर चुके थे, उसे हटाया नहीं जा सकता था। खराब टैंकर से इन्हें रिप्लेस करेंगे। - प्रमोद दुबे, महापौर

एमआइसी सदस्यों ने कहा, सत्तापक्ष को ही करना होगा आंदोलन-

यह मुद्दा एमआइसी में नहीं आया

खरीदी का मुद्दा एमआइसी में नहीं आया, न ही मुझे इनके आने की सूचना वर्कशॉप से मिली। इस संबंध में एमआइसी सदस्य निगमायुक्त से मिलेंगे। निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। - जसबीर ढिल्लन, अध्यक्ष अग्निशमन एवं यांत्रिकी विभाग, नगर निगम

निगम कौन चला रहा पता नहीं

निगम कौन चला रहा है अब तो यह भी समझ नहीं आता। पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। स्थिति अब तो यह बनती दिखाई दे रही है कि ऐसे मुद्दों पर सत्तापक्ष को ही आंदोलन करना पड़ेगा। - श्रीकुमार मेनन, अध्यक्ष, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम
 

Source:Agency