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मप्र में डेढ़ सौ करोड़ के घाटे में तीन सहकारी बैंक, करो या मरो जैसे हाला

By Mantralayanews :13-06-2018 09:06


भोपाल। प्रदेश के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की हालात खस्ता है। सतना, दतिया और रीवा बैंकों का घाटा डेढ़ सौ करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया है। ये बैंक बैंकिंग रेग्यूलेशन एक्ट की धारा 11 के दायरे में आ गए हैं यानी नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) ने कई प्रतिबंध लगा दिए हैं।

जब तक सुधार नहीं हो जाता तब तक इन्हें आर्थिक मदद भी नहीं मिलेगी। यदि यही हाल रहे तो इन बैंकों से भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग कारोबार करने का लाइसेंस भी वापस ले सकता है। कुल मिलाकर इन बैंकों के सामने करो या मरो जैसे हालात बन गए हैं। इन्हें खुद अपने पैरों पर खड़ा होना होगा।

इसी तरह मुरैना, ग्वालियर, भिंड, मंडला, होशंगाबाद, पन्ना, सीधी की स्थिति भी डांवाडोल बनी हुई है। उधर, मध्यप्रदेश की 38 जिला सहकारी बैंकों का किसानों के ऊपर करीब 18 हजार 557 करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ गया है, यदि वसूली नहीं हुई तो बैंकों में आर्थिक संकट के हालात बन सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक बीते तीन साल में खेती के अनुकूल मौसम नहीं होने की वजह से बैंकों की वसूली बुरी तरह प्रभावित हुई है। किसानों की स्थिति को देखते हुए सरकार ने कर्ज की मियाद तो अल्पावधि से बढ़ाकर मध्यावधि कर दी पर इसका असर बैंकों की वित्तीय स्थिति पर पड़ा।

सतना, दतिया और रीवा बैंकों की वसूली 25 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हुई। इसकारण इनकी नेटवर्थ नकारात्मक स्थिति में पहुंच गई। रीवा बैंक के हालात सबसे खराब हैं। कुल मिलाकर इन बैंकों को अब दूसरे किसी माध्यम से वित्तीय संसाधन नहीं मिल पाएंगे। इन्हें खुद ही अपनी वसूली बढ़ाकर अपने आप को मजबूत करना होगा।

अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक आरके शर्मा ने बताया कि नाबार्ड ने आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। इन्हें री-फायनेंस (पुनर्वित्त) नहीं मिलेगा। मार्च 2017 की स्थिति में भिंड, दतिया, भोपाल, रीवा, सतना और टीकमगढ़ बैंक संचित हानि में रहे हैं।

डगमगा जाएंगी सरकार की योजना

सूत्रों का कहना है कि सरकार की बहुत सारी योजनाओं की सफलता सहकारी बैंकों पर निर्भर है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने का काम इन्हीं के कंधों पर है। इसके लिए नाबार्ड से बड़ी मात्रा में राशि ली जाती है। यदि बैंकों की वसूली नहीं हुई और स्थिति यूं ही बनी रही तो 25 लाख किसानों को कर्ज उपलब्ध कराने का लक्ष्य पिछड़ सकता है।

बैंकों को सक्षम होना होगा, योजना बनाएंगे: गुप्ता

सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव केसी गुप्ता का कहना है कि बैंकों को खुद सक्षम होना होगा। वसूली बढ़ानी पड़ेगी और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाना पड़ेगा। मंगलवार को नाबार्ड के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में भी यह मुद्दा उठा। बैंकों को सुदृढ़ बनाने हम योजना भी बनाएंगे।

फैक्ट फाइल

कितने घाटे में बैंक

बैंक--घाटा

रीवा--68 करोड़ रुपए

दतिया--58 करोड़ रुपए

सतना--29 करोड़ रुपए
 

Source:Agency