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Date 23-06-18

एमपीईबी को प्रदेश के विद्युत उपकरण उत्पादकों से खरीद से परहेज!

By Mantralayanews :14-06-2018 07:22


मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल (एमपीईबी) के कामकाज को लेकर हमेशा ही उंगलिया उठती रहती है। लेकिन, फिर भी इसमें बड़े सुधार की कोई बड़ी गुंजाईश दिखाई नहीं देती। अब एक नया मामला सामने आया है कि एमपीईबी ने सेंट्रल विजिलेंस कमेटी (सीवीसी) के दिशानिर्देश का पालन नहीं किया, जिसे एम विट्टल द्वारा सभी सरकारी निविदाओं के लिए तैयार किया गया था। इसके तहत प्रदेश के स्थानीय विद्युत उत्पादकों से उपकरणों की खरीद के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, पर इस पर अमल नहीं हो रहा! खरीदी का सारा काम प्रदेश के बाहर उत्पादकों से किया जा रहा है। केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना की धीमी गति का कारण भी यही है कि टेंडर जारी होने के बाद भी ऑर्डर नहीं दिए जा रहे।     
एमपीईबी मध्यप्रदेश के विद्युत उपकरण उत्पादकों के साथ सहयोग नहीं करता! प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों में अधिकांश खरीदी बाहर की कंपनियों से की जाती है। स्थानीय उत्पादकों के साथ एमपीईबी का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। प्रदेश के स्थानीय विद्युत उपकरण उत्पादकों के लिए एमपीईबी के पास केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार कोई कोटा नहीं है। जबकि, अन्य सभी प्रदेशों में स्थानीय उत्पादकों खरीद को प्राथमिकता दी जाती है। यदि प्रदेश का विद्युत उपकरण उत्पादक कोई उपकरण बनाता है, तो खरीद में सबसे पहले उसे प्राथमिकता दी जाती है। अन्य प्रदेशों में स्थानीय कारखानों के लिए कोटा निर्धारित है और वे स्थानीय उत्पादकों का समर्थन भी करते हैं। एमपीईबी में केबल और कंडक्टर खरीद की कोई नीति न होने की भी जानकारी है। अकसर इनकी खरीद पर उंगलियां उठती रही है, पर इस दिशा में कोई पारदर्शी योजना नहीं बनाई गई। 
केंद्र सरकार ने सौभाग्य रू हर घर बिजली नाम से पिछले साल सितम्बर में योजना की घोषणा की थी। इसके तहत मध्य प्रदेश में सौभाग्य योजना की शुरूआत में 45 लाख परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मध्य प्रदेश में बिजली से वंचित 45 लाख परिवार को विद्युत उपलब्ध कराने के लिये प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना सौभाग्य राज्य में शुरू की गई है। प्रदेश में बिजली से वंचित 45 लाख परिवार हैं। इन परिवारों को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। 16,320 करोड़ रुपए की इस योजना के तहत देश में बिजली से वंचित करीब चार करोड़ परिवार को विद्युत उपलब्ध कराना है। 
योजना के तहत सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सभी घरों को बिजली 31 मार्च 2019 तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। सार्वजनिक क्षेत्र की रूरल इलेक्ट्रफिकेशन कारपोरेशन (आरईसी) इसकी नोडल एजेंसी है। लेकिन, इस योजना में मध्यप्रदेश में काम की गति बेहद धीमी है। सरकार ने टेंडर तो जारी किए हैं, लेकिन प्रक्रिया को निजी स्वार्थों में अटकाकर टेंडर प्रक्रिया को उलझाया जा रहा है। ट्रांसफार्मर केबल कंडक्टर के करीब 450 से 500 करोड के टेंडर की नोडल एजेंसी मध्यप्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को बनाया गया है लेकिन, वहाँ इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शीता बिल्कुल भी नही हैं। ये समझने वाली बात है ! एक तरफ जब सौभाग्य योजना को पूरी करने की जिम्मेदारी है, वहीं टेंडर को गलत तरीके से निश्चित करना और सीवीसी की गाइड लाइन का उल्लंघन करना यह इशारा करता है कि इस सबके पीछे क्या है! 
 

Source:Agency