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भविष्य की डरावनी सूरत

By Mantralayanews :30-08-2018 08:57


कल यानी मंगलवार को जिस तरह से पुणे क्राइम ब्रांच की टीम ने देश भर के अलग-अलग जगहों पर छापे मारी की और सामाजिक कार्यकर्ताओं की देश भर से गिरफ्तारियां हुईं, यह इस बात का प्रमाण है, देश में अब फासीवादी चेहरे के ऊपर लगा मुखौटा उतर चुका है और तानाशाही मानसिकता खुलकर अपना रूप दिखाने लगी हैं। दरअसल, इस साल जनवरी की शुरुआत में महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पुलिस ने ये गिरफ्तारियां की हैं। दरअसल, 1818 में ब्रिटिश सेना में शामिल दलितों खासकर महारों ने मराठाओं को युद्ध में पराजित किया था। इसलिए दलित आज भी इस दिन को याद कर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और अपनी जीत का उत्सव भी मनाते हैं। इस साल इस जीत की 2सौवीं वर्षगांठ थी, इसलिए बड़ा आयोजन था।

लेकिन इस अवसर पर हिंसा भड़क गई और महाराष्ट्र का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आया। शुरुआती तौर पर यह दलित बनाम सवर्ण हिंसा प्रतीत हुई, लेकिन अब पुलिस का कहना है कि इस आयोजन से एकदिन पहले यलगार परिषद का जो कार्यक्रम हुआ था, उसमें भड़काऊ भाषण दिए गए थे और इस वजह से हिंसा भड़की है। भीमा कोरेगांव हिंसा में एक और चौंकाने वाला आरोप यह भी लगा कि राजीव गांधी की हत्या की तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या की साजिश रची जा रही है।

पुलिस ने एक आरोपी के घर से इस संबंध में एक चि_ी बरामद होने की बात कही। जून में इस आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया, जिसमें वकील, लेखक, कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले लोग थे। मंगलवार को भी जो गिरफ्तारियां हुई हैं, उनमें वकील, पत्रकार, कवि, सांस्कृतिक आंदोलनकर्मी आदि शामिल हैं। इन लोगों का सबसे बड़ा कसूर तो यही है कि ये मानवाधिकारों और हाशिए पर पड़े लोगों के इंसाफ के लिए आवाज उठाते हैं, बिना डरे अपनी बात रखते हैं, फिर चाहे वह सरकार के खिलाफ ही क्यों न हो। लेकिन इस तरह की विचारधारा वाले तमाम लोगों के लिए एक नया शब्द गढ़ लिया गया है - अर्बन नक्सली यानी शहरी नक्सली। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि नक्सलवाद का बेहद क्रूर और हिंसक चेहरा पिछले कुछ सालों में देखने मिला है। अपने हक की लड़ाई में नक्सलियों ने बहुत से बेकसूरों की भी जान ली और इस वजह से जनता के बीच उनका खौफनाक रूप सामने आया। जिस सामंती शोषण और अत्याचार के कारण नक्सलवाद पनपा था, वे वजहें तो भुला दी गईं और समाज में यही बात प्रसारित हुई कि यह आतंकवाद से अलग नहीं है। इसका एक दुष्परिणाम यह हुआ कि नक्सलियों के नाम पर आदिवासियों और ग्रामीणों पर बेतहाशा अत्याचार हुए। उनके हक और इंसाफ के लिए बात करने वाले लोग भी देश के दुश्मन की तरह पेश किए जाने लगे। उन्हें नक्सल समर्थक, देशद्रोही, छद्म बुद्धिजीवी और न जाने क्या-क्या कहा जाने लगा। मानवाधिकार की बात करना, माने देश के खिलाफ बात करना, यह सामान्य विचार बना लिया गया।

सुधा भारद्वाज, वरवर राव, गौतम नवलखा, वरनॉन गोंज़ाल्विस और अरुण फऱेरा, मंगलवार को गिरफ्तार किए गए ये पांचों लोग भी इसलिए शक के दायरे में हैं, क्योंकि इन्होंने न केवल वंचितों और शोषितों के लिए आवाज़ उठाई, बल्कि उनके बीच, उनके साथ रहकर काम भी किया है। पुलिस और जांच एजेंसियों को पूरा हक है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाएं। हिंसा और हत्या जैसी गंभीर साजिशों पर सख्ती से पेश आए।

लेकिन यह देखकर निराशा होती है कि पुलिस-प्रशासन तब अपनी जिम्मेदारी इतनी तत्परता से निभाता नहीं दिखता, जब देश में भीड़ की हिंसा होती है, अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर निशाने पर लिया जाता है, जो वामपंथी होते हैं या दक्षिणपंथ के साथ नहीं होते, उन्हें अपनी राष्ट्रभक्ति साबित करने के लिए कहा जाता है। जुलाई में जर्मनी में एक प्रदर्शनी लगी थी, जिसमें 1934 से 1945 के बीच नाजी हुकूमत के दौरान लगाए गए पीपुल्स कोर्ट के बारे में दिखाया गया। इन अदालतों में तथाकथित देश के दुश्मनों पर मुकदमे चलते थे। देश के दुश्मन माने, जो लोग वामपंथी विचारधारा की बात करते थे, हिटलर की हुकूमत के खिलाफ गीत लिखते थे, या उसके विरोध में बातें करते थे। इन लोगों को देशद्रोही ठहरा कर सजा ए मौत दी गई।

भारत में अभी लोकतंत्र मजबूत है और उसके एक स्तंभ न्यायपालिका पर अब भी लोगों का भरोसा है, यहां पीपुल्स कोर्ट जैसी नौबत नहीं बनी है। लेकिन सरकार की नीतियों, सवर्ण मनुवादी मानसिकता और पूंजीवादी शक्तियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, लेखकों, पत्रकारों, वकीलों को गिरफ्त में लेना भविष्य की डरावनी सूरत दिखाता है। अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुका  है और कोर्ट ने इन पाँचों की गिरफ्तारी पर नाराज़गी जताते हुए कहा है कि अगर लोकतंत्र में विरोध की आवाज़ को दबाया गया तो विस्फोट होगा..जी हाँ, अगर आप अपनी तारीफ़ सुनने हक रखते हैं तो विरोध की आवाज़ सुनने के लिए भी तैयार रहें..
 

Source:Agency