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भारत बंद में विपक्षी एकता

By Mantralayanews :11-09-2018 08:58


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर भाजपा के तमाम बड़े नेता अपने कार्यकर्ताओं को यही समझाते रहते हैं कि विपक्ष का महागठबंधन नहीं होगा, विपक्षी दलों में कोई एकता नहीं है, भाजपा का 50 सालों तक कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, मोदीजी अजेय हैं, भाजपा अटल है और न जाने क्या-क्या। अभी दो दिनों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी भाजपा नेता कार्यकर्ताओं को विपक्षी ताकत के डर से बाहर निकालने की कोशिश करते नजर आए। यहां डर का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि अगर विपक्ष का डर नहीं होता तो भाजपा अपने कार्यक्रमों, नीतियों, योजनाओं, सफलताओं पर बात करती। विपक्ष में कोई दम नहीं है, ऐसा भरोसा अपने कार्यकर्ताओं को नहीं दिखाती। 8 और 9 सितंबर की दो दिनों की कार्यकारिणी के बाद 10 सितंबर को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने भारत बंद का जो आह्वान किया था, उसमें भी विपक्षी एकता खूब देखने मिली। यूं तो आम जनता के साथ-साथ विपक्षी दल और भाजपा की सहयोगी शिवसेना तक पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर सरकार पर सवाल उठा चुकी है। लेकिन जब सरकार ने ऐसी कोई इच्छा नहीं दिखाई कि वह तेल की कीमतों पर नियंत्रण लगाने के उपाय करेगी तो पेट्रोल-डीज़ल-गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने 10 सितम्बर को भारत बंद का आह्वान किया था। विपक्षी दलों के साथ-साथ कांग्रेस ने सभी सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से 'भारत बंद’ का समर्थन करने का आह्वान किया। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अलावा समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी , द्रमुक, राष्ट्रीय जनता दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी , जद(एस), आम आदमी पार्टी, तेलुगू देशम पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा , नेशनल कांफ्रेंस, झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक , एआईयूडीएफ, केरल कांग्रेस (एम), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, आईयूएमएल और लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शामिल हुए। मोदी सरकार के खिलाफ लगातार आवाज उठाने वाली तृणमूल कांग्रेस ने बंद का सैद्धांतिक समर्थन दिया, व्यावहारिक नहीं। शिवसेना भी इसमें शामिल होने वाली थी, लेकिन खबरें हैं कि उद्धव ठाकरे से अमित शाह ने फोन पर बात की, देवेन्द्र फड़नवीस ने भी बात की, तो उसने रविवार को फैसला लिया कि वह बंद में शामिल नहीं होगी। महाराष्ट्र और केेंद्र में सरकार में शामिल शिवसेना ही अगर भाजपा की नीतियों के खिलाफ बुलाए गए इस बंद का हिस्सा बनती, तो भाजपा को बड़ी किरकिरी होती।

खैर.. विपक्ष के बंद को असफल बनाने या सहयोगी नेताओं को इस तरह रोकने से जाहिर है कि भाजपा विपक्षी एकता की ताकत को समझ रही है, बस उसे जाहिर नहीं होने देना चाहती। इस बंद की अगुवाई करने के लिए अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा दो दिन पहले खत्म कर, अचानक लौटे राहुल गांधी ने सभी को चौंका दिया। उन्होंने फिर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों और फैसलों पर जमकर खिंचाई की और लगे हाथ यह भी सुना दिया कि हम जो 70 साल में नहीं कर पाए, वह मोदीजी ने चार सालों में कर दिखाया। राहुल गांधी के तेवर और विपक्षी दलों के नेताओं का उन्हें समर्थन यह संकेत देता है कि महागठबंधन आकार ले रहा है। हालांकि चुनाव आते-आते समीकरण कैसे बदलेंगे, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। वैसे इस बंद का व्यापक असर देश में देखने मिला। कांग्रेस ने पहले ही कहा था कि यह बंद सुबह 9 से 3 तक होगा, ताकि आम जनता को तकलीफ न हो। लोगों से हिंसा से दूर रहने की अपील भी की गई थी। लेकिन बिहार समेत कुछ जगहों पर बंद में हिंसा, तोड़फोड़ भी देखने मिली। लेकिन व्यापक तौर पर बंद का आम जनता ने भी सहयोग किया। इस बंद को रचनात्मक कार्यक्रमों, जैसे नुक्कड़ नाटकों, भाषण-निबंध प्रतियोगिताओं, वैचारिक गोष्ठियों के आयोजन से और प्रभावशाली बनाया जा सकता था। पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़नेे से किसानों, गृहणियों, व्यापारियों को किन तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है, अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव के बावजूद घरेलू स्तर पर क्या कदम सरकार को उठाने चाहिए, कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को कैसे बर्बाद किया जा रहा है, ऐसे कई मुद्दों पर बंद के दौरान जनता को जागरूक करना भी असरकारी होता। भाजपा इस बंद को असफल बताते हुए हिंसक घटनाओं के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहरा रही है। बेहतर होता अगर बंद की सफलता या असफलता की व्याख्या छोड़ वह पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने की कोई नीयत दिखाती। इस माह के 10 दिन निकल गए, पेट्रोल 80 के पार चला गया, लेकिन मोदीजी के मुंह से इस बारे में एक शब्द नहींनिकल रहा है। क्या वे इतने लाचार हैं कि जनता की तकलीफ देखकर भी कुछ नहीं कर सकते?
 

Source:Agency