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घुड़सवार अकादमी ने खच्चर के भाव में बेचे घोड़े, ऐसे किया गड़बड़झाला

By Mantralayanews :08-10-2018 08:20


भोपाल। मध्य प्रदेश घुड़सवार अकादमी ने लाखों रुपए में घोड़े खरीदे और दो-चार साल में ही उन्हें खच्चरों के भाव बेच दिया। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की घुड़सवार अकादमी के इन घोड़ों को जयपुर और बेंगलुरु से दो लाख से लेकर साढ़े सात लाख रुपए में खरीदने के बाद कुछ साल में ही 15 हजार तक की मामूली कीमत में बेच दिया गया।

मध्य प्रदेश घुड़सवार अकादमी में वर्तमान में 30 घोड़े हैं, जो प्रतियोगिताओं में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। अकादमी के कोच कैप्टन भागीरथ बताते हैं कि घोड़े-घोड़ियों की औसत उम्र 20 से 24 साल तक होती है। अकादमी ने 2011 से 2015 के बीच करीब 16 घोड़े जयपुर, बेंगलुरु, मुंबई से खरीदे थे। इनमें से नौ को औने-पौने दामों में बेच दिया गया। यही नहीं, अकादमी में बेहतर परफॉर्मेंस देने के नाम पर 2017-18 में 11 घोड़े-घोड़ियां खरीदी गई हैं।

कैप्टन भागीरथ का कहना है कि, प्रतियोगिता में चोट लगने या लाने-ले जाने में बीमार होने पर घोड़े-घोड़ियों के परफार्मेंस पर असर पड़ता है, जिससे उसकी उपयोगिता कम हो जाती है।

खरीदी और बेचने की कीमतों में अंतर

जयपुर के ब्रह्मा विजय स्टड एंड लाइव स्टॉक फार्म से 2011 में सात लाख 35 हजार रुपए में खरीदी गई स्ट्राम घोड़ी को पांच साल बाद मात्र 15 हजार 500 रुपए में भोपाल के बैरागढ़ के एक व्यक्ति को बेच दिया गया। बेंगलुरु से दिसंबर 2014 में पेरीनाला घोड़ी को छह लाख रुपए में खरीदा गया था, लेकिन दो साल बाद ही उसे मात्र 48 हजार रुपए में बेच दिया गया।

जयपुर के इक्वेस्ट हॉर्स राइडिंग अकादमी से लान्सर घोड़ी चार लाख में खरीदी और पांच साल बाद उसे 44 हजार रुपए और जयपुर के श्रीराम स्टड फार्म से साढ़े तीन लाख में खरीदी गई टारजन घोड़ी को दो साल में ही 15 हजार में बेच दिया गया। 2011 से 2015 के बीच खरीदे घोड़े या घोड़ी में से अभी अकादमी में सात हैं। इनमें 16 साल की सिंड्रेला, 15 साल की जुबेदा, 10 साल का मोनटेरो व चार्ली, 11 साल का टेबलस, 16 साल का मेजेक व 14 साल का स्टेडी ही बचे हैं। अन्य स्पेनी, ब्लैकी, चांदनी और स्ट्रेला को बेच दिया गया है। स्पेनी और स्ट्रेला को तो खरीदी के कुछ साल में बेच दिया गया था। इन्हें बेंगलुरु व मुंबई से 10-10 लाख में खरीदा था।

कोच तय करते हैं उपयोगिता

घोड़े या घोड़ी की उपयोगिता कोच तय करते हैं। उसका कितना उपयोग हो चुका है और आगे उसकी उपयोगिता कितनी है। टेक्निकल कमेटी इनकी ऑफसेट कीमत भी तय करने के साथ घोड़ों की खरीदी और बिक्री भी करती है।

- बीएस यादव, संयुक्त संचालक, मप्र खेल एवं युवा कल्याण संचालनालय
 

Source:Agency