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सनातन संस्था का आतंक बेनकाब, 'साधकों' के खतरनाक इरादे कैमरे में कैद

By Mantralayanews :09-10-2018 07:40


महाराष्ट्र के थिएटरों के बाहर 2008 में बम धमाकों में कथित भूमिका को लेकर सनातन संस्था के दो साधकों के हैरान करने वाले कबूलनामे सामने आए हैं. इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने इन दोनों साधकों को कैमरे पर खुद ही आतंकी हमलों में अपनी कथित भूमिका के बारे में बताते हुए कैद किया.

सम्मोहन विद्या से इलाज के माहिर डॉ जयंत आठवले ने 1999 में सनातन संस्था की स्थापना की. ये संगठन स्पष्ट तौर पर अपना प्रारंभिक लक्ष्य  'आध्यात्मिकता' को बताता है. अपनी वेबसाइट पर संस्था ने लिखा है- 'संस्था का उद्देश्य समाज में जिज्ञासा रखने वालों को आध्यात्मिक ज्ञान देना है. जन-जन के मन में धार्मिक बर्ताव को बिठाना और साधकों को उनके आध्यात्मिक उत्थान के लिए व्यक्तिगत तौर पर दिशा-निर्देशन देना है.'

सनातन संस्था और इसके केंद्र महाराष्ट्र, गोवा और देश के अन्य हिस्सों में भी फैले हैं. ये संस्था विवादों से अछूती नहीं है. इस संस्था को 2008 में महाराष्ट्र में थिएटर्स और सिनेमाहालों के बाहर बम धमाकों के आरोप में महाराष्ट्र ATS ने चार्जशीट में नामजद किया. आरोप है कि सनातन संस्था ने कुछ फिल्मों और नाटकों में जिस तरह से हिन्दुत्व की छवि पेश की जा रही थी, उसे आपत्तिजनक मानते हुए कथित तौर पर ये धमाके किए.
बीते कई साल से सनातन संस्था जोर देकर अपने खिलाफ सभी आरोपों को खारिज करती रही है, लेकिन इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने ऐसे सबूत जुटाए हैं जो सनातन संस्था की संभावित भूमिका की ओर इशारा कर रहे हैं.

सात साल पहले मंगेश दिनकर निकम को ट्रायल कोर्ट ने ठाणे, पनवेल, और वाशी में 2008 में हुए बम धमाकों से जुड़े केस में बरी कर दिया था, लेकिन अब निकम ने खुद कैमरे पर कबूल किया है कि उसने विस्फोटक प्लांट किए थे.

पुलिस रिकॉर्ड में संस्था साधक के तौर पर दर्ज पहचान वाले 45 वर्षीय निकम ने माना कि जो बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने डिफ्यूज़ कर दिया था, उसे उसने ही प्लांट किया था. निकम के मुताबिक संस्था के हिसाब से वाशी थिएटर में एक मराठी नाटक में हिन्दू देवी-देवताओं की गलत छवि पेश की जा रही थी, उसी का बदला लेने के लिए ऐसा किया गया.

निकम ने सतारा जिले में अपने घर पर इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर से कहा- 'वाशी में था, तो मैंने (IED) रखा  था. रखकर आ गया. मेरा इतना रोल था.'

निकम ने कहा, 'वाशी केस जिसमें हम शामिल थे, वहां लोग नाटक में हमारे देवी-देवताओं का उपहास कर रहे थे. वो बस बंद हो जाए, इसके लिए हमने कोशिश की थी. उसके आगे कुछ नहीं.'

Source:Agency